सामाजिक भागीदारी से संक्रामक रोग टीबी पर विजय पाने की है बारी

विश्व टीबी दिवस पर सदर अस्पताल परिसर में एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन
जन जागरूकता टीबी को खत्म करने का कारगर हथियार, हमारे एकजूट प्रयास से हारेगा टीबी

अररिया(बिहार)विश्व यक्ष्मा (टीबी) दिवस के मौके पर सदर अस्पताल परिसर में एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।टीबी हारेगा देश जीतेगा के संकल्प के साथ आयोजित इस कार्यशाला में भाग लेते हुए स्वास्थ्य अधिकारियों ने टीबी रोग के उन्मूलन के लिये किये जा रहे प्रयासों पर विस्तृत चर्चा की।रोग से जुड़े लक्षण व इलाज के लिये उपलब्ध इंतजामों पर चर्चा करते हुए उन्होंने इससे जन-जन तक पहुंचाने का अपना संकल्प दोहराया। कार्यशाला का उद्घाटन Iडीडीसी मनोज कुमार, सिविल सर्जन डॉ एमपी गुप्ता, सीडीओ डॉ वाईपी सिंह, एसीएमओ डॉ सीपी मंडल, एनसीडीओ डॉ डीएनपी साह, डीटीएल केयर पर्णा चक्रवती, जिला टीबी कॉर्डिनेटर डीएएम सनोज कुमार, डीसी क्यूए डॉ मधु सहित अन्य ने सामूहिक रूप से किया।

टीबी पर मुक्कमल फतह के लिये हमें दिखाने होगी अपनी एकजुटता:
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डीडीसी मनोज कुमार ने कहा विपरित परिस्थितियों का सामना करते हुए भी हम पूर्व में कई संक्रामक बीमारियों पर मुक्कमल फतह हासिल कर चुके हैं।सामूहिक प्रयास से विपरित परिस्थितियों का सख्ती से मुकाबला किया जा सकता है।कोरोना संकट इसका ताजा उदाहरण है।जब स्वास्थ्य व प्रशासन से जुड़े लोगों ने अपनी जान की परवाह किये बिना पीड़ित मानवता की सेवा में जुटे रहे। टीबी जैसे संक्रामक रोग पर मुक्कमल फतह पाने के लिये भी हमें ऐसी ही एकजुटता व सक्रियता दिखानी होगी।स्वास्थ्य विभाग इसमें पूरी तरह सक्षम है।संभावित रोगियों की पहचान,उनकी जांच व इलाज के साथ-साथ नियमित रूप से दवा सेवन को लेकर निगरानी की व्यवस्था को दुरूस्त कर टीबी को निर्धारित समयाविधि से पूर्व भी हराया जा सकता है।

टीबी रोगियों के लिये उपलब्ध सुविधाओं को जन-जन तक पहुंचाना जरूरी:
सिविल सर्जन डॉ एमपी गुप्ता ने टीबी रोगियों के उपलब्ध सुविधाओं का हवाला देते हुए कहा रोग पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के लिये सरकारी स्तर से जांच से लेकर इलाज तक का नि:शुल्क इंतजाम है।टीबी शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकता है।बच्चों में टीबी संक्रमण के मामलों को उन्होंने गंभीर बताया।उन्होंने कहा कि यही बच्चे बाद में युवा होंगे।इससे संक्रमण का प्रसार तेज होने की संभावना है।टीबी रोगियों के लिये उपलब्ध सुविधाओं को जन-जन तक पहुंचा कर इस पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना संभव है। उन्होंने एमडीआर व एसडीआर टीबी के मामलों पर प्रभावी नियंत्रण की बात कही।

हर स्तर पर टीबी रोगियों को मिल रही है जरूरी सुविधाएं:
जिला संचारी रोग विशेषज्ञ डॉ वाईपी सिंह ने कहा टीबी के एक संक्रमित व्यक्ति से दस से 25 लोगों के संक्रमित होने की संभावना रहती है।15 दिन से अधिक समय तक खांसी का होना,बलगम के साथ खून का आना या नहीं आना,वजन कम होना,रात में तेज बुखार आना सामान्य तौर पर टीबी के लक्षण हैं।अगर नजदीकी किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखे तो तुरंत उनकी जांच जरूरी है।जांच की सुविधा सभी पीएचसी में उपलब्ध है।टीबी रोगियों को बेहतर पोषण के लिये सरकार पांच सौ रुपये निक्षय योजना के तहत दे रही है।जिले से बाहर के हेल्थ सेंटर पर इलाज के लिये जाने-आने का खर्च,टीबी रोगियों की खोज व सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिये प्रेरित करने वाले प्राइवेट चिकित्सक,आशा,एएनएम को भी निर्धारित प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाता है। पहली बार केयर इंडिया का सहयोग प्राप्त होने पर टीबी मुक्त भारत निर्माण के इस अभियान को बल मिलने की बात उन्होंने कही।

रोग के लक्षण व बचाव उपायों का व्यापक प्रचार-प्रसार जरूरी:
डीटीएल केयर पर्णा चक्रवती ने कहा कि रोग संबंधी लक्षण व बचाव संबंधी उपायों का व्यापक प्रचार प्रसार टीबी रोग को नियंत्रित करने के प्रयासों में महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।इससे टीबी रोगियों के खोज अभियान का गति मिली है।सामूहिक प्रयास से 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का उन्होंने भरोसा जताया। जिला टीबी कोर्डिनेटर दामोदर प्रसाद के मुताबिक जिले में टीबी रोगियों की संख्या में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। टीबी रोगियों की खोज में निजी चिकित्सकों की भागीदारी भी बढ़ी है। इससे अभियान को मदद मिल रहा है। उन्होंने बताया वर्ष 2018 में जहां 2362 टीबी के मामले सामने आये, वहीं वर्ष 2019 में ये 3163 पर जा पहुंचा। वर्ष 2020 में 2011 टीबी के मामले जिले में सामने आये। तो कोरोना संक्रमण की वजह से 2021 में सघन जांच अभियान के प्रभावित होने की बात उन्होंने कही।

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