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भारतीय समकालीन राजव्यवस्था और अभिशासन विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ आयोजन

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ा है:- प्रो. के. जयप्रसाद

हरिओम कुमार
मोतिहारी(बिहार)महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी, बिहार के राजनीति विज्ञान विभाग एवं भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद के संयुक्त तत्वावधान में ‘भारतीय समकालीन राजव्यवस्था और अभिशासन’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन 27 जुलाई एवं 28 जुलाई को हुआ।

इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी की अध्यक्षता महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा कर रहे थे। अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो शर्मा ने कहा कि महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग ने ऐसा वृहद कार्यक्रम किया जिसमें राजनीति विज्ञान से जुड़े देश के कई प्रखर वक्ताओं और अतिथियों ने न केवल अपने विचार रखें बल्कि राजनीति विज्ञान, भारतीय राजव्यवस्था, शासन व्यवस्था, संवैधानिक संरचना, लोकतांत्रिक प्रक्रिया जैसे विभिन्न मुद्दे व विषय पर गहनता से चर्चा भी किया गया। इस कार्यक्रम से देश भर में विभाग का नाम हो गया है। आगे उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में लोकतंत्र में बड़ा बदलाव भी देखने को मिला। चुनावों में मतदान प्रतिशत बढ़ा है। न्यायपालिका मजबूत हुई है। जनमत निर्माण करने वाली संस्थाएं स्वतंत्र है। समकालीन राजव्यवस्था की बात करें तो हमें न सिर्फ कोरोना महामारी के बाद उत्पन्न हुई हालात को देखना चाहिए बल्कि पिछले चार-पांच सालों को देखें तो पता चलता है कि भारतीय राजव्यवस्था सुदृढ़ हुई है।

संगोष्ठी के दूसरे दिन के सत्र में विशिष्ट वक्ता के तौर पर केंद्रीय विश्वविद्यालय, केरल के प्रति कुलपति एवं भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर के. जयप्रसाद ने कहा कि वर्तमान में भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है। पिछले 6 सालों में शासन भ्रष्टाचार मुक्त हो गया है, यह सकारात्मक राजनीति का संकेत है। शासन में पारदर्शिता नजर आ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्थानीय शासन का प्रभाव दिख रहा है। स्वच्छ भारत अभियान ने ग्रामीण जीवन शैली को भी बदला है। संसदीय लोकतंत्र में बदलाव हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का मान बढ़ा है। कोई भी योजना किसी सरकार के लिए तब सफल मानी जाती है जब सही से क्रियान्वयन हो, वर्तमान केंद्र सरकार की योजनाएं सफल क्रियान्वित हो रही है।

मुख्य अतिथि के तौर पर गुलबर्ग यूनिवर्सिटी कर्नाटक के कार्यकारी कुलपति प्रोफेसर चंद्रकांत एम यातनूर ने कहा कि अच्छे शासन के लिए समय के साथ संविधान में बदलाव एवं संशोधन भी जरूरी है। लोकतंत्र में बहुमत का होना लोकतंत्र को मजबूत बनाता है। भारत में कुछ राजनीतिक पार्टियां किसी खास वर्ग, समुदाय को लेकर राजनीति करते हैं और यह वर्ग, समुदाय इन राजनीतिक पार्टियों के लिए वोट बैंक की तरह होते हैं। कुछ अपराधिक छवि वाले भी राजनीति में होते हैं। यह खुशी की बात है कि इन मामलों पर अब सुप्रीम कोर्ट भी संज्ञान ले रही है। कोविड के बाद डिजिटल युग की शुरुआत हुई है। राजनीति में भी डिजिटल डिप्लोमेसी देखने को मिल रहा है। डिजिटल डिप्लोमेसी के तहत वर्चुअल मीटिंग एवं सभाएं समय की मांग है।

मध्यप्रदेश सामाजिक विज्ञान शोध संस्थान, उज्जैन के निदेशक प्रोफेसर यतींद्र सिंह सिसोदिया ने कहा कि शासन में पारदर्शिता का होना आवश्यक है। शासन निष्पक्ष एवं न्यायपरक हो, यह अच्छे शासन की विशेषता है। गांव में ग्राम सभा की बैठकें ग्रामीण विकास में सहायक है। इससे जमीनी स्तर पर लोकतंत्र मजबूत हो रहा है।

रास्ट्रीय वेब संगोष्ठी के पहले दिन सायं चार बजे एक सिम्पोजियम का भी आयोजन किया गया। जिसमें देश के मूर्धन्य राजनीति शास्त्रियों ने भाग लिया। जिसकी अध्यक्षता कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने की। मुख्य अतिथि प्रो. कौशल किशोर मिश्र, कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस, भुवनेश्वर ओडिसा थे। विषय प्रवर्तन प्रो. एच. के. शर्मा, निदेशक मानव संसाधन विकास केंद्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने किया और विशिष्ट अतिथि प्रो. जे. के. पटनायक, प्रो- वीसी मिजोरम यूनिवर्सिटी थे। अतिथियों का स्वागत प्रो. आनंद प्रकाश , डीएसडब्ल्यू, एमजीसीयूबी ने किया।

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के अधिष्ठाता एवं इस संगोष्ठी के निदेशक प्रो. राजीव कुमार ने कहा कि यह शैक्षणिक कार्यक्रम बड़े स्तर पर आयोजित किया गया जिसमें पूरे देश से प्रतिभागी सक्रिय रूप से जुड़े रहे। देश के विभिन्न प्रांतों से लगभग सैकड़ों शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र भी प्रस्तुत किया।
यह राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी गूगल मीट ऐप के माध्यम से आयोजित किया गया, साथ ही विश्वविद्यालय के फेसबुक पेज से भी लाइव किया गया। कार्यक्रम में पूरे देश के विभिन्न राज्यों से लगभग सैकड़ों छात्र, शोधार्थी एवं अध्यापक सहभागिता किए।

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के गांधी एवं शांति अध्ययन विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर सुनील महावर इस राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी के संयोजक थे। संगोष्ठी की सह-संयोजिका राजनीति विज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सरिता तिवारी थी। संगोष्ठी के आयोजन सचिव राजनीति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. नरेंद्र कुमार आर्य,समन्वयक डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह, सह-आयोजन सचिव विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पंकज कुमार सिंह, डॉ. ओम प्रकाश गुप्ता थे।
संगोष्ठी के संचालन में डॉ प्रशांत कुमार, डॉ सुजीत कुमार चौधरी, डॉ कैलाश प्रधान,डॉ परमात्मा कुमार मिश्र, डॉ अंबिकेश कुमार त्रिपाठी, डॉ अभय विक्रम सिंह, डॉ सुनील दीपक घोडके, डॉ दिनेश व्यास, डॉ अनिल प्रताप गिरी, , डॉ अनुपम कुमार वर्मा, सिस्टम एनालिस्ट दीपक दिनकर एवं विश्वविद्यालय के शोधार्थी सक्रिय रुप से जुड़े रहे।प

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