• प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रिजवाना तबस्सुम ने पेश की मिसाल
• संक्रमित हुई पर नहीं हारा हौसला, मजबूत इरादों के साथ स्वस्थ हो दोबारा लौटी कार्य पर
• आउटडोर में इलाज कराने आने वाले मरीजों को इलाज के साथ दे रहे जागरूकता के संदेश
किशनगंज(बिहार)कोविड-19 के दौर में लोगों को संक्रमण से बचाव की जानकारी देते एवं लोगों का उपचार करते आपने चिकित्सकों को तो देखा होगा. लेकिन इसके पीछे उनका सेवा भाव एवं त्याग अभी भी उभर कर लोगों के सामने नहीं आ सका है. कोरोनावायरस के सामने एक आम आदमी हो या कोई चिकित्सक सभी को संक्रमण का समान रूप से खतरा है. इसके बावजूद स्वास्थ्य कर्मी कोरोना को मात देने में दिन-रात जुटे हैं. कोरोना संक्रमितों की देखरेख करते हुए कई चिकित्सक संक्रमण की चपेट में भी आए, लेकिन इसे मात देकर दोबारा अपने कर्तव्य निवर्हन के कार्य में लग गए. चिकित्सक को धरती पर ईश्वर का दूसरा रूप क्यों कहा जाता है, इस बात को महामारी ने पूर्णता चरितार्थ किया है.
पेश की सेवा भाव की मिसाल:
कोरोना काल में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में सेवा दे रही 32 वर्षीय प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रिजवाना तबस्सुम ने अनूठी मिसाल पेश की है। संक्रमण काल में इन्होंने अस्पताल आकर मरीजों का उपचार किया। इसी क्रम में वह संक्रमण की चपेट में आ गयी , लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने बुलंद हौसले से कोरोना को मात दिया और आज स्वस्थ होकर दोबारा ड्यूटी पर लौट चुकी हैं। करीब 17 दिन के होम क्वारेंटाइन में रहने और रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद वह इस बीमारी को भली-भांति महसूस कर चुकी हैं और अब धीरे-धीरे खुद को पहले से ज्यादा मजबूत महसूस कर रही हैं। इनका लक्ष्य पहले की ही भांति संक्रमण काल में अस्पताल आने वाले और बीमार लोगों की सेवा करना है। यह अस्पताल के कर्मियों के साथ-साथ आम लोगों को लगातार जागरूक भी कर रही हैं। इनका कहना है कि भय की जगह लोग बचाव और सतर्कता के नियमों का पालन करें और अपने साथ दूसरों को भी सुरक्षित रखें।
आत्मविश्वास और जज्बा हो तो जीत सकता है कोई भी जंग :
डॉक्टर रिजवाना तबस्सुम को अब पता है कि यदि वह दोबारा संक्रमण की चपेट में आती हैं तो उन्हें कैसे स्वस्थ होना है और दूसरों को स्वयं का अपना उदाहरण देते हुए कैसे प्रेरित करना है। सेवा के भाव और स्वस्थ होने के बाद आत्मविश्वास से भरपूर इन्होंने सबसे महत्वपूर्ण बात यह कही कि ‘इस बीमारी से ग्रस्त होने के बाद व्यक्ति को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए, अगर व्यक्ति में आत्मविश्वास और किसी भी कठिनाई से लड़ने का जज्बा हो तो वह बड़े से बड़े जंग को जीत सकता है’. साथ ही उन्होंने कहा परिजनों का साथ इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरी होता है, जो मरीज मानसिक मजबूती प्रदान करती है। इससे ही बहुत से समस्याओं का हल हो जाता है।
समाज के साथ घुलना -मिलना जरूरी:
डॉक्टर रिजवाना तबस्सुम बताती हैं कि इस वक्त चिकित्सकों, नर्सों, आशा कर्मियों और अन्य रूप से स्वास्थ्य कार्य में लगे कोरोना वारियर्स को समाज का साथ मिलना सबसे ज्यादा जरूरी है। ये या इनके परिवार संक्रमण के प्रभाव में आते हैं तो इन्हें हीन भावना से न देखें। यह ऐसा समय है जब कोई भी कभी भी संक्रमण की चपेट में आ सकता है, तब उनके प्रति अन्य लोगों का सकारात्मक नजरिया का होना भी जरुरी है। इसके साथ ही सरकार द्वारा बताए गयी प्रर्याप्त सतर्कता और सावधानी बरतने की भी जरूरत है। यह वक्त भय में रहने और घबराने का नहीं है, बल्कि एक दूसरे का साथ देने का है।
बीमारी की न करें अनदेखी:
डॉक्टर रिजवाना तबस्सुम कहती हैं कि जैसे-जैसे वक्त बदल रहा है कोविड-19 के कई लक्षण निकल कर सामने आ रहे हैं। हालांकि बदलते मौसम में यह जरूरी नहीं है कि आपको कोरोना हो गया हो। ये सामान्य फ्लू के भी लक्षण हो सकते हैं। लेकिन अगर समस्या बढ़ती है या आप ऐसे किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए है तो तुंरत जांच करवा लें। नियमों का सही से पालन करने, जागरूकता बरतने, सावधानी और सुरक्षित माहौल में रहने से आप सदैव सुरक्षित और स्वस्थ रहगे। यही मूल मंत्र है स्वयं के साथ सामाज को सुरक्षित रखने का। साथ ही साथ उन्होंने समाज के सभी लोगो के लिए संदेश दिया है कि अभी दो गज की दूरी के साथ -साथ मास्क का प्रयोग अवश्य करें. इससे न बल्कि आप सुरक्षित रहेंगे और समाज भी सुरक्षित रहेगा !
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