बिहार

शुरू हुआ अभियान सारण को एनीमिया मुक्त बनाने के लिए

छपरा सारण जिले को एनीमिया मुक्त बनाया जायेगा। एनिमिया मुक्त भारत अभियान के तहत बुधवार को शहर के छत्रधारी बाजार स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-41 पर बच्चों को एनिमिया की दवा खिलाकर कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। सिविल डॉ. माधवेश्वर झा ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।  इस अवसर पर सिविल सर्जन ने कहा कि एनीमिया मुक्त सारण कार्यक्रम के अंतर्गत 6-59 माह के शिशु, 5-9 वर्ष के बच्चे, 10-19 वर्ष के विद्यालय जाने वाले किशोर-किशोरियों प्रजनन उम्र की महिलाओं, गर्भवती और धात्री महिलाओं में एनीमिया के रोकथाम हेतु आईएफ़ए (आयरन फोलिक एसिड )का अनुपूरण किया जाना है।

एनीमिया बहुत बीमारियों की जड़ है और सारण को इससे  मुक्त करना है । इस संदर्भ मे  सिविल सर्जन डॉ माधेश्वर झा ने बताया कि“ एनीमिया एक गंभीर स्वास्थ समस्या है जो मानसिक और शारीरिक क्षमता को प्रभावित करती है । ज़िले मे अधिकाधिक लोग इससे पीड़ित हैं । एनिमिया मुक्त भारत में गुलाबी गोली और आइएफए का सिर को अभियान में जोड़ा गया है। गुलाबी और नीली गोली साप्ताहिक स्कूल के माध्यम से हर बुधवार के दिन खिलाई जाएगी और जो बच्चे एवं बच्चियां स्कूल नहीं जाती हैं उन्हें आंगनबाड़ी केंद्र पर आंगनबाड़ी सेविका के द्वारा केंद्र पर ही खिलाया जाना है। इस अवसर जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. विरेंद्र कुमार चौधरी, यूनिसेफ के जिला समन्वयक आरती त्रिपाठी, नोडल पदाधिकारी, डॉ. राजीव रंजन कुमार, आंगनबाड़ी के सेविका-सहायिका व अन्य मौजूद थी।

 
सप्ताह के प्रत्येक बुधवार व शनिवार को दी जायेगी दवाजिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. विरेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि प्रत्येक बुधवार और शनिवार को आंगनबाड़ी सेविका घर-घर जाकर बच्चों को दवा पिलायेंगी। इसके लिए आंगबनबाड़ी सेविकाओं को ट्रेनिंग भी दी गयी है। 6 माह से 59 माह के शिशु को 1 एमएल दवा प्रत्येक बुधवार और शनिवार को पिलाना है।  6 वर्ष से 9 वर्ष के बच्चों को गुलाबी टेबलेट देना है। 11 वर्ष से 19 वर्ष के बच्चे को आयरन की नीली गोली देनी है । गर्भवती को 180 गोली छः माह तक खाना है।

यह अभियान निरंतर चलेगा। इसके लिए कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है। सभी बच्चों को यह दवा पिलायी व खिलायी जायेगी। क्या है एनिमियाबच्चों के रक्त में प्रति डेसीलीटर 11 ग्राम से कम हेमोग्लोबिन और महिलाओं के रक्त में प्रति डेसीलीटर 12 ग्राम से कम हेमोग्लोबिन होने की स्थिति को एनिमिया या रक्ताल्पता की स्थिति माना जाता है।


क्या है आंकड़ा: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ सर्वेक्षण 4 के अनुसार सारण जिले मे 6 से 59 माह के 61.9 प्रतिशत बच्चे, प्रजनन आयु वर्ग की 54.1 प्रतिशत महिलाएं एवं 50.4 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से ग्रसित हैं । किशोरावस्था में खून की कमी के कारण  मानसिक और शारीरिक विकास बाधित होता है तथा कुपोषण की संभावना बढ़ जाती है| वही किशोरावस्था मे अगर सही पोषण न मिले तो दैनिक कार्य करने कि क्षमता घट जाती है और एकाग्रता मे भी कमी आती है । 

रेस्पोंस  टीम का किया गया गठनज़िला स्तर पर जहां ज़िला प्रतिरक्षण पदाधिकारी इसके नोडल होंगे वही प्रखण्ड स्तर पर प्रभारी चिकित्सा पदधिकारी को इसका नोडल निर्धारित किया गया है । इसके अलावा ज़िला और प्रखण्ड स्तर पर आकस्मिक रेस्पोंस टीम का भी गठन किया गया है और सभी जगहों पर आईएफ़ए गोली एवं सीरप का आपूर्ति कर दिया गया है । सभी आंगनबाड़ी सेविकाओं को निर्देश दिया गया है कि इसका रिपोर्ट एलएस को देंगी। उसके एलएस इस रिपोर्ट को जिला स्तर के पदाधिकारी को देंगी। हर सप्ताह रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया है।

Nagmani Sharma

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