भगवानपुर हाट(सीवान)प्रखंड क्षेत्र में बेकार पड़ी आर्द्र भूमि के बेहतर उपयोग को लेकर गुरुवार को निरीक्षण हुआ। उप निदेशक सारण परिक्षेत्र सुमन कुमार और फिशरीज कॉलेज मीठापुर के व्याख्याता मनीष कुमार श्रीवास्तव ने क्लस्टर डेवलपमेंट के तहत समेकित मत्स्य विकास कार्यक्रम की समीक्षा की। निरीक्षण में पाया गया कि क्षेत्र में बड़ी मात्रा में आर्द्र भूमि है। यह जमीन सालभर या छह से आठ महीने तक पानी से भरी रहती है। यहां खेती नहीं हो पाती या फिर केवल एक फसल होती है।
ऐसे में इन जमीनों पर मछली पालन को बढ़ावा देने की योजना है। इससे ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा। कुपोषण से जूझ रहे लोगों को सस्ती दर पर मछली उपलब्ध होगी। मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि यह क्षेत्र मत्स्य उत्पादन में नई क्रांति ला सकता है। योजना सफल रही तो सिवान, आंध्र प्रदेश को भी पीछे छोड़ सकता है।
निरीक्षण के दौरान मत्स्य उत्पादन और बिक्री में आ रही कठिनाइयों पर चर्चा हुई। किसान मनोज सहनी और ललित मोहन ने बताया कि बारिश नहीं होने पर पानी की समस्या होती है। सरकार अनुदानित दर पर पांच एचपी पंप दे रही है, जो पर्याप्त नहीं है। किसानों ने मांग की कि सरकार आवश्यकता अनुसार पंप देने की व्यवस्था करे। जिससे किसान अपनी जरूरत के अनुसार पंप लगा सकें। साथ ही बाजार की व्यवस्था करने की भी मांग की गई।
इस मौके पर जिला मत्स्य पदाधिकारी अपर्णा सिंह, मत्स्य प्रसार पदाधिकारी अभिजीत कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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