छपरा:सेवा कुटीर सारण में रह रहे नौशाद आलम को 10 साल बाद उनका परिवार मिल गया। नौशाद कटिहार जिले के रहने वाले हैं। 27 अगस्त 2024 को गांधी चौक के पास वह भीख मांगते मिले थे। सेवा कुटीर के क्षेत्र समन्वयक विकास कुमार सिंह ने उन्हें देखा। बातचीत में वह मानसिक रूप से परेशान लगे। उन्हें सेवा कुटीर लाया गया। वहां नियम के अनुसार सभी सुविधाएं दी गईं।
शुरुआत में वह ज्यादा बात नहीं करते थे। कुछ दिन बाद उनका इलाज कोईलवर के मानसिक अस्पताल में कराया गया। समय पर दवा और देखभाल से वह धीरे-धीरे ठीक हुए। इलाज के बाद उन्होंने अपना स्थाई पता बताया। इसके बाद विकास कुमार सिंह ने स्थानीय प्रशासन की मदद से उनके परिजनों से संपर्क किया। वीडियो कॉल पर पूरे परिवार से बात कराई गई। नौशाद को देखकर परिवार खुशी से झूम उठा।
25 जून 2025 को समाज कल्याण विभाग के सहायक निदेशक की मौजूदगी में नौशाद को उनके परिजनों को सौंपा गया। परिवार उन्हें खुशी-खुशी अपने साथ ले गया।
नौशाद पहले दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में काम करते थे। पारिवारिक तनाव के कारण वह मानसिक अवसाद में चले गए। 2012 में घर छोड़ दिया। कुछ समय तक छोटे-मोटे काम किए। फिर मानसिक रोगी बन गए। भीख मांगकर जीवन चलाने लगे। किसी एक जगह नहीं रुके। इसी दौरान भटकते हुए छपरा पहुंचे। सेवा कुटीर के कर्मचारियों की मेहनत से अब वह अपने परिवार के साथ हैं। उन्हें सौंपने के समय लेखपाल, एएनएम, केयर टेकर और गार्ड भी मौजूद थे।
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