पूर्णियाँ(बिहार)पूरे सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है. इस दौरान सभी लोगों को सही पोषण की जानकारी देने के साथ ही उसके उपयोग करने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है. आंगनवाड़ी केन्द्रों में हर माह 19 तारीख को अन्नप्राशन दिवस मनाया जाता है. इस माह भी सभी आंगनवाड़ी केन्द्रों पर 6 माह के शिशुओं का अन्नप्राशन कराया गया. जिले के धमदाहा प्रखंड के विशनपुर ग्राम पंचायत, रामटोला में आंगनवाड़ी केन्द्र संख्या- 175 में जिलाधिकारी राहुल कुमार द्वारा बच्चे को खीर खिलाकर उनका अन्नप्राशन करवाया गया. इस दौरान जिलाधिकारी राहुल कुमार ने कहा कि बच्चों में कुपोषण को दूर करने के लिए उन्हें सही पोषण दिया जाना जरूरी है. पोषण के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए पूरे सितम्बर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है. इस दौरान अलग-अलग गतिविधियों का आयोजन कर लोगों में भी पोषण के प्रति जागरूकता लाई जा रही है. सामान्य दिनों में भी आंगनवाड़ी केन्द्रों पर सेविकाओं द्वारा शिशुओं को पोषण की जानकारी दी जाती है. लोगों को अपने बच्चों के सही स्वास्थ्य के लिए उसका उपयोग करना चाहिए. इसके साथ ही जिलाधिकारी ने लोगों को कोरोना से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग और हमेशा मास्क का प्रयोग करने का भी निर्देश दिया. इस दौरान विधायक लेसी सिंह, उप विकास आयुक्त मनोज कुमार सिन्हा, आईसीडीएस डीपीओ शोभा सिन्हा, पोषण अभियान की जिला समन्यवक निधि प्रिया, स्थानीय सीडीपीओ आदि उपस्थित रहे.
6 माह बाद स्तनपान के साथ शिशु को दें ऊपरी आहार :
आईसीडीएस जिला कार्यक्रम पदाधिकारी शोभा सिन्हा ने कहा कि 6 माह बाद स्तनपान के साथ-साथ शिशु को अनुपूरक आहार भी दिया जाना चाहिए. स्तनपान के अतिरिक्त दिन में 5 से 6 बार शिशु को सुपाच्य खाना देना चाहिए. शिशु को मल्टिंग आहार (अंकुरित साबुत आनाज या दाल को सुखाने के बाद पीसकर) दें, क्योंकि माल्टिंग से तैयार आहार से शिशुओं को अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है. न खाने की स्थिति में भी थोड़ी-थोड़ी ऊपरी आहार शिशु को दिन में कई बार देते रहना चाहिए जिससे कि उसे खाने की आदत लग सके.
महिलाओं को दी गई अनुपूरक आहार की जरूरत सम्बधी जानकारी :
केन्द्र में उपस्थित महिलाओं को भी शिशुओं के लिए 6 माह के बाद के उपरी आहार की जरूरत के विषय में भी जानकारी दी गयी. पोषण अभियान की जिला समन्यवक निधि प्रिया ने बताया कि 6 माह से 9 माह के शिशु को दिन भर में 200 ग्राम सुपाच्य मसला हुआ खाना, 9 से 12 माह में 300 ग्राम मसला हुआ ठोस खाना, 12 से 24 माह में 500 ग्राम तक खाना खिलाऐं. इसके अलावा अभिभावकों को बच्चों के दैनिक आहार में हरी पत्तीदार सब्जी और पीले नारंगी फल को शामिल करें. इससे शिशुओं में कुपोषण की सम्भावना नहीं होगी और वह स्वास्थ्य रह सकेंगे.
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