छपरा:प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की पहली मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती की 60वीं पुण्यतिथि पर मंगलवार को आध्यात्मिक ज्ञान दिवस मनाया गया। स्थानीय सेवा केंद्र पर आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ों भाई-बहनों ने भाग लिया। सभी ने मम्मा को श्रद्धांजलि दी और आत्म-सुधार का संकल्प लिया।
सेवा केंद्र की मुख्य संचालिका ब्रह्माकुमारी अनामिका दीदी ने बताया कि मम्मा का जन्म पंजाब के अमृतसर में पिता पोकर दास और माता रोचा के घर हुआ था। उन्हें प्यार से ‘मम्मा’ कहा जाता था। वे त्याग, नारी सशक्तिकरण और आध्यात्मिकता की प्रतीक थीं। 24 जून 1965 को उन्होंने शरीर त्याग दिया था। उनका प्रसिद्ध कथन था—गुणवान बनो, गुण देखो और गुण दान करो।
अनामिका दीदी ने कहा कि मम्मा तीव्र बुद्धि की स्वामिनी थीं। बाबा की मुरली सुनकर गहन मंथन करती थीं। 28 वर्षों तक निरंतर ज्ञान साधना की। जून 1965 में संपूर्ण बन गईं। शिव बाबा की सहयोगी बनकर सूक्ष्म वतन चली गईं। आज भी उनके जीवन, गुण, वचन और कर्म से प्रेरणा मिलती है।
कार्यक्रम में मम्मा के जीवन पर प्रकाश डाला गया। बताया गया कि उनकी दृष्टि मात्र से आत्मा का मन शांत और पवित्र हो जाता था। उन्होंने स्वयं को कमेंद्रीजीत और स्वराज्यधिकारी बनाया। दूसरों को भी मनुष्य से देवता बनने की कला सिखाई।
इस अवसर पर योग तपस्या और भोग का आयोजन भी हुआ। पानपति माता, जनक दुलारी माता, गायत्री माता, सरिता माता, वीणा माता, अनीता बहन, वीणा बहन, महादेव भाई, कल्याण भाई, राजा भाई, अमन भाई और अर्जुन भाई सहित कई भाई-बहनों ने भाग लिया। कार्यक्रम भगवान बाजार थाना क्षेत्र के गुदरी राय चौक के पास स्थित सेवा केंद्र पर हुआ।
अनामिका दीदी ने बताया कि यह दिन विश्व के 140 से अधिक देशों में आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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