बाढ़ के दौरान गर्भवती महिलाओं, किशोरियों की परेशानी को ले बैठक कर लिया जायजा:
किशोरियों के साथ बैठक कर व्यवहार परिवर्तन को लेकर की गई चर्चा: जलपा रत्ना
बाढ़ के दौरान गर्भवती महिलाओं को कठिनाइयों का सामना करना मजबूरी: बिहार प्रमुख
पूर्णिया(बिहार)ज़िले में यूनिसेफ़ की राष्ट्रीय स्तर की टीम अपने तीन दिवसीय दौरे पर स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी लेने के लिए पहुँची हुई है। जिसके तहत दूसरे दिन सुदूर ग्रामीण एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्र बायसी के इलाकों का दौरा किया गया। यूनिसेफ की राष्ट्रीय टीम के द्वारा सुदूर ग्रामीण इलाके के बायसी प्रखंड के गांगर गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का भौतिक निरीक्षण किया गया। आईसीडीएस की महिला पर्यवेक्षिका, आंगनबाड़ी सेविका,सहायिका के साथ आंगनबाड़ी केंद्र पर आने वाले बच्चों को लेकर बातचीत की गई। इसके साथ ही स्थानीय पंचायत जनप्रतिनिधियों के साथ सामुदायिक बैठक का आयोजन कर बाढ़ की विभीषिका झेल रहे ग्रामीणों के साथ विचार विमर्श किया गया। बाढ़ के दौरान स्वास्थ्य से संबंधित कार्यक्रमों को किस तरह से गुजरना पड़ता है, इसको लेकर समीक्षात्मक बैठक कर जानकारी ली गई। बैठक के दौरान उपस्थित समूह से जानकारी ली गई कि सरकार द्वारा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए कैसे निबटना पड़ता है। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न तरह की योजनाएं संचालित की जाती हैं। लेकिन बाढ़ के समय गर्भवती महिलाओं को किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है, इसका अवलोकन किया गया।इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक नजमूल होदा,यूनिसेफ़ की ओर से प्रोग्राम प्रबंधक शिवेंदु पांड्या,शिक्षा विशेषज्ञ पुष्पा जोशी,न्यूट्रिशन विशेषज्ञ रवि नारायण,स्वास्थ्य विशेषज्ञ सिद्धार्थ रेड्डी, सामाजिक व्यवहार में बदलाव (एसबीसी) विशेषज्ञ मोना सिंहा,शिशु सुरक्षा विशेषज्ञ गार्गी साहा,वाश विशेषज्ञ प्रभाकर सिंहा,इमरजेंसी विशेषज्ञ बंकू बिहारी सरकार,जज पवनजीत सिंह,यूनिसेफ़ के क्षेत्रीय सलाहकार शिव शेखर आनंद सहित कई अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
किशोरियों के साथ बैठक कर व्यवहार परिवर्तन को लेकर की गई चर्चा: जलपा रत्ना
यूनिसेफ़ की क्षेत्र सेवाओं के प्रमुख जलपा रत्ना ने बताया कि वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण काल के दौरान मरीजों का सबसे ज्यादा रुझान ग्रामीण स्तर के अस्पतालों के प्रति बढ़ा है। क्योंकि अस्पताल के चिकित्सक,नर्स व कर्मचारियों का उत्तम व्यवहार व निःशुल्क उपचार किया जाता है। क्योंकि ज़िले के सभी अस्पतालों में प्रसूति विभाग से संबंधित सभी तरह की सुविधाओं को सुदृढ़ बनाया गया है। इसके साथ ही इससे जुड़ी हुई सेवाओं की गुणवत्ता में पहले की अपेक्षा सुधार हुआ है। स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्र पर किशोरी एवं बालिकाओं के साथ बैठक का आयोजन कर विभिन्न तरह के बिंदुओं पर चर्चा की गई।सामाजिक स्तर पर व्यवहार में कितना बदलाव हुआ है। हालांकि अभी भी व्यवहार में परिवर्तन करने की आवश्यकता है। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में सामाजिक स्तर पर बदलाव करने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण काल के दौरान विभिन्न तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा होगा। क्योंकि उस समय तरह-तरह की अफवाहें फैलाई गई थी। जिसको लेकर लोगो को जागरूक किया गया।
बाढ़ के दौरान गर्भवती महिलाओं को कठिनाइयों का सामना करना मजबूरी: बिहार प्रमुख
वहीं यूनिसेफ़ बिहार की प्रमुख नसिफ़ा बिंते साफ़िक ने बताया कि यूनीसेफ के द्वारा कई तरह के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का संचालन किया जाता है। जिसमें मुख्य रूप से जीवन रक्षक टीके, एचआईवी पीड़ित बच्चों व उनकी माताओं के लिए दवा, कुपोषण के उपचार के लिए दवाइयां निःशुल्क उपलब्ध कराती हैं। यूनिसेफ वर्तमान समय में पांच प्राथमिकताओं को केन्द्र बिंदु मानकर कार्य कर रही है। जिसमें बच्चों का विकास, बुनियादी शिक्षा, लिंग के आधार पर समानता (इसमें लड़कियों की शिक्षा शामिल भी है), बच्चों का हिंसा से बचाव, शोषण, बाल-श्रम, एचआईवी एड्स एवं बच्चों के अलावा बच्चों के अधिकारों के वैधानिक संघर्ष के लिए काम करता है। बाढ़ के समय गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान विभिन्न तरह की पीड़ाओं से गुजरना पड़ता है। इसके लिए क्या उपाय होने चाहिए। इस पर खुल कर बातचीत की गई। घोघड़िया कल्याण विकास समिति के पदाधिकारियों के साथ आपदा प्रबंधन को लेकर समीक्षा बैठक कर जानकारी ली गई।
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