Categories: Home

आदिम संचार सिद्धांत के प्रणेता हैं भरत मुनिः प्रो.ओमप्रकाश सिंह

महात्मा गांधी केंद्रीय विवि के मीडिया अध्ययन विभाग में भरतमुनि संचार शोध केंद्र का हुआ उद्घाटन

अभा संत सभा के महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद जी ने अपने आशीर्वचन में शोध केंद्र की स्थापना को महत्वपूर्ण पहल बताया

मोतिहारी (बिहार) महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की ओर से संचालित महामना मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक सह जानेमाने संचार विशेषज्ञ प्रो.ओमप्रकाश सिंह ने कहा है कि भरतमुनि न केवल भारतीय बल्कि आदिम संचार सिद्धांत के जनक हैं। उनकी प्रसिद्ध कृति नाट्यशास्त्र का उल्लेख आदिकवि वाल्मीकि की रामायण और महर्षि व्यास रचित महाभारत में भी है। इस ग्रंथ में मानवीय संचार प्रणाली के इतने तौर-तरीकों का वर्णन है कि पाश्चात्य संचार के सिद्धांत इनके आगे कुछ भी नहीं हैं। यह बात उन्होंने महात्मा गांधी केंद्रीय विवि के मीडिया अध्ययन विभाग से सबंद्ध भरतमुनि संचार शोध केंद्र के उद्घाटन के अवसर पर बतौर मुख्य वक्ता अपने संबोधन में कही। कार्यक्रम का आयोजन विवि के जिला स्कूल स्थित चाणक्य परिसर के राजकुमार शुक्ल सभागार में किया गया था।
कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित करते प्रो. सिंह ने कहा कि पाश्चात्य विद्वानों में हर बात को ईशा के सौ डेढ़ सौ साल आगे पीछे का बताने की परंपरा रही है जबकि भरतंमुनि का नाट्यशास्त्र अत्यंत प्राचीन और संचार के सिद्धांतों के मामले में दुनिया का सबसे पहला सिद्धांत है। नृत्य, गीत और संवाद सहित कलाओं और मानवीय संवेदना के इतने पक्ष इसमें परिभाषित किए गए हैं कि इसे भारतीय मनीषा ने पंचम वेद की मान्यता दी है। न केवल प्राचीन संचार दर्शन के नजरिए से बल्कि नई शिक्षानीति में व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के नजरिए से भी महर्षि भरत मुनि के नाट्यशास्त्र का बेहद महत्व है। उनके नाम पर शोध केंद्र की स्थापना कर विवि के मीडिया विभाग ने बड़ा काम किया है। इसके लिए विवि के कुलपति सहित पूरा प्रशासन बधाई का पात्र है।

उद्घाटन समारोह में बतौर अतिथि अपने आशीर्वचन देते अखिल भारतीय संत समाज के महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि भारत के इतिहास में भरत की परंपरा बहुत आदरणीय रही है। चाहे संचार दर्शन के प्रणेता भरतमुनि हों या दुष्यंत के पुत्र भरत, चाहे भगवान राम के अनुज भरत हों या संन्यास परंपरा के भर्तृहरि, सबने इतिहास में अमिट छाप छोड़ी है। नाट्यशास्त्र के प्रणेता भरतमुनि इस मामले में विशिष्ट हैं कि उन्होंने अभिव्यक्ति के विभिन्न भावों को जनसामान्य तक पहुंचाने का विशिष्ट सिद्धांत दिया। भारत की आध्यात्मिक औऱ सांस्कृतिक उन्नति में इन सिद्धांतों की महती भूमिका रही है। आधुनिक संचार प्रणाली भी नाट्यशास्त्र के सिद्धांतों की उपेक्षा नहीं कर सकती, उसे अभी वहां तक पहुंचना है जहां तक नाट्यशास्त्र की पहुंच काफी पहले से है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह शोध केंद्र संचार के नए सिद्धांतों के साथ भारतीय परंपरा के अनछुए पहलुओं को दुनिया के सामने लाने में सफल होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महात्मा गांधी केंद्रीय विवि के प्रतिकुलपति प्रो.जी.गोपाल रेड्डी ने अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विवि ने पांच साल की छोटी अवधि में ही ग्यारह विभिन्न शोधकेंद्रों की स्थापना कर विशिष्ट क्षेत्र में शोध की महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि तैयार की है। उन्होंने कहा कि समय आ गया है कि हम अपने अतीत के अनछुए पहलुओं को विश्व पटल पर मजबूती से रखें और इसमें शोध केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि कुलपति डा.संजीव कुमार शर्मा के नेतृत्व में विवि नित नए आयामा स्थापित कर रहा है।
इससे पहले आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए विभागाध्यक्ष डा.प्रशांत कुमार ने कहा कि महाभारत कालीन समाज में तकनीक के हर क्षेत्र में हम आगे थे लेकिन कालांतर में हम अपनी उपलब्धियों की ओर से विमुख हो गए या कर दिए गए। इस शोध केंद्र के माध्यम से भारतीय प्राचीन परंपराओं का अध्ययन करने का शोधकर्ताओं को अवसर मिलेगा। शोध केंद्र के गठन की अनुमति के लिए उन्होंने कुलपति का आभार व्यक्त किया। नवगठित शोध के्द्र के समन्वयक डॉ.अंजनी कुमार झा ने अपने संचालन सह स्वागत में विवि के कुलपति, प्रतिकुलपति समेत अन्य पदाधिकारियों सहित मीडिया अध्ययन विभाग के सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों से शोध केंद्र के संचालन में सहयोग करने का आग्रह किया। सह समन्वयक डा.साकेत रमण ने शोध केंद्र की स्थापना की पृष्ठभूमि की चर्चा करते इसमें कुलपति व विभागाध्यक्ष के योगदान की सराहना की। इस अवसर पर विवि के विभिन्न विभागों के डीन, विभागाध्यक्ष एवं प्राध्यापक जिसमें डीएसडब्ल्यू प्रो.आनंद प्रकाश, डीन एवं वित्त अधिकारी प्रो. विकास पारीक, परीक्षा नियंत्रक केके उपाध्याय, प्रो.अजय कुमार गुप्ता, प्रो. प्रणवीर सिंह, प्रो. अन्तरत्रण पाल मीडिया अध्ययन विभाग के शिक्षक डा.परमात्मा कुमार मिश्र, डा.सुनील दीपक घोडके, डा.उमा यादव सहित मीडिया अध्ययन के तमाम शोधार्थी व विद्यार्थी मौजूद थे। साथ ही वर्चुअल प्लेटफार्म पर भी गूगल मीट के जरिए दर्जनों लोग इस आयोजन से जुड़े रहें।

Mani Brothers

Leave a Comment

Recent Posts

थावे शिक्षक सम्मान -2026 से सम्मानित हुए भगवानपुर के शिक्षक शैलेश कुमार

भगवानपुर हाट (सीवान )जिले के भगवानपुर हाट प्रखंड के नया प्राथमिक विद्यालय खैरवा मुशहर टोला…

2 weeks ago

राजेंद्र कॉलेज का पूर्ववर्ती छात्र समागम में अपनी यादों को साझा कर हुए भावुक

छपरा(सारण)लोकनायक जय प्रकाश नारायण के नाम पर स्थापित जय प्रकाश विश्वविद्यालय छपरा की अभिभूत इकाई…

3 weeks ago

14 मार्च को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के प्रचार प्रसार के लिए रथ रवाना

सिवान(बिहार) आगामी 14 मार्च 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के प्रचार-प्रसार हेतु…

3 weeks ago

जनसंख्या संतुलन के नायकों का सीएस डॉ. राजकुमार चौधरी ने किया सम्मान

• सबसे अधिक महिला बंध्याकरण के लिए डॉ. मेहा कुमारी को मिला आवार्ड • चिकित्सा…

3 weeks ago

India AI Impact Summit 2026 में Elon Musk की अनुपस्थिति से सनसनी, OpenAI की मजबूत मौजूदगी के बीच चर्चा

लेखक:इरशाद खान नई दिल्ली, 20 फरवरी 2026 — भारत सरकार द्वारा आयोजित India AI Impact…

3 weeks ago

निक्षय मित्र योजना:डाॅ अंजू सिंह ने छपरा के 35 जबकि एकमा के 20 टीबी मरीजों के बीच फूड पैकेट का किया वितरण

छपरा:शहर स्थित ठाकुरबाड़ी महिला विकास कल्याण समिति की संचालिका डॉ. अंजू सिंह के द्वारा विगत…

4 weeks ago