स्वास्थ्य विभाग की समीक्षात्मक बैठक में स्वास्थ्य सुविधा के साथ ही परिवार कल्याण कार्यक्रम को बढ़ावा देने पर जोर

जिला पदाधिकारी-सह-अध्यक्ष, जिला स्वास्थ्य समिति की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग की मासिक एवं आईसीडीएस की समीक्षात्मक बैठक आयोजित

जल्द ही 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के भी कोरोना टीकाकरण

किशनगंज(बिहार)जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा मरीजों को गुणवत्तापूर्ण तथा सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जिला पदाधिकारी निरंतर प्रयासरत हैं। इसी क्रम में शहर के रचना भवन के सभागार में गुरुवार को जिला पदाधिकारी डॉ आदित्य प्रकाश की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग एवं सामेकित बाल विकास कार्यक्रम की समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। मासिक बैठक में सिविल सर्जन डॉ श्रीनंदन ने बताया कि प्रखंडवार टीकाकरण, मातृत्व स्वस्थ्य, शिशु स्वास्थ्य परिवार कल्याण, किशोर-किशोरी कार्यक्रम, वेक्टर जनित रोग, टीबी नियत्रंण, अंधापन, गैर संचारी रोग, एएनसी जांच, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, अस्पताल में प्रसव से जुड़ी सेवाओं को सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है।
समीक्षात्मक बैठक में सिविल सर्जन डॉ श्रीनंदन ने कहा कि जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाई जा रही विभिन्न प्रकार की योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों को हर हाल में मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में सदर अस्पताल में डायलिसिस यूनिट, डिजिटल एक्सरे , अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस ब्लड बैंक, डिलीवरी रूम , सिटी स्कैन की सुविधा दी जा रही है। जिससे आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। माह जनवरी में गर्भवती माताओं एवं नवजात शिशुओं के लिए चलाये जा रहे कार्यक्रम में प्रसव पूर्व 4 जांच 74 % किया गया, जिले में जनवरी में शिशु के टीकाकरण की उपलब्धि ओ पि वि में 57 %, बी सी जी टीकाकरण 90 %, एचईपी बी -0 102 %, पेन्टा 01 99%, पेन्टा 03 – 90 %, मिजिलस 88 % पूर्ण टीकाकरण किया गया है। आंगनबाड़ी केन्द्रों में ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस जिले में 101% लक्ष्य के अनुरूप आयोजन किया गया। विदित हो कि जिले के सभी चिकित्सा केन्द्रों में प्रतिदिन दर्जनों की संख्या में गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच की जाती है। दवा की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए कहा कि विभाग के पास सभी बीमारियों की दवा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।

सामेकित बाल विकास परियोजना की समीक्षा:
सामेकित बाल विकास परियोजना की समीक्षा में जिला पदाधिकारी द्वारा सेविका सहायिका चयन एवं क्रियाशील आंगनबाड़ी केंद्रों की अद्यतन स्थिति, टोकन प्रणाली से पोषाहार/ टी एच आर वितरण की अद्यतन स्थिति, होम विजिट के माध्यम से आंगनबाड़ी क्षेत्र का निरीक्षण, मनरेगा एवं आईसीडीएस के अभिसरण से भवन निर्माण, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, सजन अभियान, न्यायालयवाद की गहन समीक्षा उपरांत जिला पदाधिकारी द्वारा निर्देश दिया गया कि आईसीडीएस द्वारा चलाई जा रही सभी योजनाओं का क्रियान्वयन गृह भ्रमण (होम विजिट) के माध्यम से 100 प्रतिशत सुनिश्चित करने एवं योजनाओं का लाभ लाभुकों तक अनिवार्य रूप से पहुंचे इसकी पूर्ण जिम्मेवारी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, महिला पर्यवेक्षिका एवं संबंधित सेविका की होगी। प्रत्येक माह टी० एच० आर०/पोषाहार वितरण हेतु निर्धारित तिथि से पूर्व व ससमय राशि की निकासी कोषागार से करना सुनिश्चित करेंगे ताकि विभाग द्वारा निर्धारित तिथि में होम विजिट के माध्यम से टी० एच० आर०/ पोषाहार का लाभ लाभुकों को उपलब्ध कराया जा सके।

जल्द ही 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का भी होगा टीकाकरण:
समीक्षा बैठक में सिविल सर्जन डॉ श्रीनंदन ने कहा कि जिले में कोरोना पॉजिटिव के रेट मात्र 1.47 % हैं। जिले में प्रथम चरण के प्रथम टीकाकरण में स्वास्थ्यकर्मियों के 8134 के लक्ष्य के विरुद्ध 6634 का टीकाकरण एवं 7200 लक्ष्य के विरुद्ध में 4275, फ्रंटलाइन वर्करों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को दूसरे डोज में 6633 के लक्ष्य के विरुद्ध 1589 लोगों का टीकाकरण किया गया है। 50 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के टीकाकरण का अभियान जल्द ही शुरू होगा। इस चरण में 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के साथ ही गंभीर रूप से बीमार लोगों को टीका लगाया जायेगा। इसके लिए माइक्रोप्लानिंग कर लाभुकों की सूची तैयार की जायेगी। टीकाकरण के लिए नागरिकों को कोविन प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण करवाना होगा। यह पंजीकरण ओ.टी.पी. आधारित आधार सत्यापन से किया जाएगा।

स्वास्थ्य सुविधा के साथ ही परिवार कल्याण कार्यक्रम को बढ़ावा देने पर जोर:
बैठक में परिवार कल्याण कार्यक्रम को बढ़ावा देने, प्रसव कक्ष की बेहतरी सहित अन्य योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। परिवार नियोजन के लिए अपनाए जाने वाली विधि पीपीआईयूसीडी की जानकारी दी गई। माह जनवरी में पीपीआईयूसीडी लक्ष्य के अनुरूप कुल 72 % लक्ष्य प्राप्ति हुई है, आईयूसीडी 38% लक्ष्य प्राप्ति हुई, परिवार नियोजन के लिए आईयूसीडी सबसे उपयुक्त माध्यम है। चिकित्सक व कर्मी महिलाओं को दो बच्चों के बीच दो या दो से अधिक वर्ष के अंतर के लिए आईयूसीडी का प्रयोग करने की जानकारी दें। आईयूसीडी लगाने के बाद महिलाओं के शरीर पर इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। महिलाएं चीर फाड़ के नाम पर बंध्याकरण से डरती हैं, उनके लिए आईयूसीडी बेहतर विकल्प है। सिविल सर्जन ने बताया प्रसव के 48 घंटे के अंदर पीपीआईयूसीडी, गर्भ समापन के बाद पीएआईयूसीडी व कभी भी आईयूसीडी को किसी सरकारी अस्पताल में लगवाया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से जहां अनचाहे गर्भ से बचा जा सकता है तो इसके इस्तेमाल से सेहत को कोई नुकसान नहीं है।

स्वास्थ्य सुविधा को बेहतर बनाये रखना ही हमारा प्रथम कार्य:
जिले में स्वास्थ्य सुविधा को सुचारु रूप से क्रियान्वयन करने हेतु सिविल सर्जन डॉ श्री नंदन ने सभी प्राथमिक चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक दिशा निर्देश दिया। जिसमें सातों प्रखंडों के सभी स्वास्थ्य उपकेन्द्र, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, स्वास्थ्य उपकेंद्रों में कायाकल्प के तहत सभी कार्य करने से स्वास्थ्य सुविधा को बेहतर बनाया जा सकता है। बैठक में डॉ कौशल किशोर, अस्पताल, जिला कार्यक्रम प्रबंन्धक डॉ. मुनाज़िम, जिला समन्वयक विश्वजीत कुमार, इपिडेमियोलॉजिस्ट रीना प्रवीण, यूनिसेफ के एसएमसी एजाज अफजल,केयर के प्रशुनजीत प्रमाणिक, सी-फार के जिला समन्वयक, सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, सभी सामेकित बाल विकास परियोजना पदाधिकारी सभी महिला पर्यवेक्षिका, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंन्धक, लेखापाल आदि उपस्थित थे।

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