हिंदी को 21वीं सदी की भाषा बनानी है तो सभी को ‘गांधी श्रम’ करना होगा -प्रो.नंदकिशोर पांडेय

मोतिहारी(बिहार)महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी, बिहार एवं शिक्षा, संस्कृति उत्थान न्यास,बिहार प्रान्त के संयुक्त तत्वावधान में ‘हिंदी विभाग’ द्वारा “हिंदी पखवाड़ा”(14-28 सितंबर 2020) के अंतर्गत ’21वीं सदी में हिंदी:चुनौतियाँ और संभावनाएँ’ विषयक राष्ट्रीय ई-संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

ई-संगोष्ठी की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.संजीव कुमार शर्मा ने की। मुख्य-अतिथि के रूप में प्रो.नंदकिशोर पांडेय पूर्व निदेशक, केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा मौजूद रहे |
केन्द्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय ई-संगोष्ठी में मुख्य-अतिथि के रूप में प्रो.नंद किशोर पांडेय (पूर्व निदेशक, केंद्रीय हिंदी संस्थान,आगरा) ने अपने व्यक्तव्य में गांधी जी के उदाहरणों के माध्यम से ‘भाषा-श्रम’ पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यदि हिंदी को 21वीं सदी की भाषा बनानी है तो सभी को ‘गांधी-श्रम’ करना होगा। हिंदी भाषा के साथ ही अन्य सभी भारतीय भाषाओं के संरक्षण से सभी को जुड़ना होगा। 21वीं सदी की हिंदी तब बनेगी जब ‘क वर्ग’ के हिंदी भाषी प्रांत अपना कार्य हिंदी के माध्यम से संपन्न करेंगे। हम सभी को हिंदी के शब्दों का ‘आग्रही’ बनना होगा। हिंदी के ‘दुराग्रही’ नहीं ‘आग्रही’ बनें।

प्रख्यात तकनीकविद एवं माइक्रोसॉफ्ट इण्डिया में स्थानीय भाषाएँ एवं सुगम्यता प्रभाग के निदेशक बालेंदु शर्मा दाधीच कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित थे।प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज हिंदी आधुनिक तकनीक के सभी स्तरों पर मौजूद है। वर्तमान समय में तकनीकी दृष्टि से हिंदी की सबसे बड़ी चुनौती ‘जागरूकता’ है। श्री दाधीच ने रोचक व्याख्यान के दौरान विस्तार सहित आभासीय प्रजेंटेशन भी प्रस्तुत न केवल प्रतिभागियों का ज्ञानवर्धन किया बल्कि उन्हें मंत्रमुग्ध भी कर दिया| दाधीच जी का स्वागत-परिचय डॉ. अतुल त्रिपाठी (सहायक आचार्य,सूचना एवं संगणक विभाग)) ने प्रस्तुत दिया।
मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग की प्रोफ़ेसर और हिंदी माध्यम कार्यान्वय निदेशालय, दिल्ली की निदेशक प्रो. कुमुद शर्मा ने विस्तार से भूमंडलीकरण, संचार क्रांति एवं हिंदी की स्थिति पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी भूमंडलीकरण एवं संचार क्रांति की सदी है। इस संदर्भ में हिंदी का फलक बढ़ रहा है। जीवन,शिक्षण,व्यवसाय आदि सभी क्षेत्रों में हिंदी का स्वरूप बदला है। ‘संख्या-बल’ भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन में सहायक है, इसका मूल्यांकन भी आवश्यक है। भारतीय भाषाओं के झगड़े में ‘हिंदी’ के महत्व को कम होने से बचाना होगा। हिंदी ‘वर्चस्व’ की भाषा नहीं, ‘गति’ की भाषा है। हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर श्री श्याम नंदन ने प्रो.कुमुद शर्मा का स्वागत-परिचय दिया।
अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिहार के कुलपति प्रो.संजीव कुमार शर्मा ने सभी वक्ता-अतिथियों के वक्तव्यों के मूल-मंत्र से सभी को जोड़ा।उन्होंने ने कहा कि विकास के साथ-साथ भाषा का ‘संस्कार’ भी आवश्यक है। हिंदी के साथ ही सभी स्थानीय भाषाओं एवं बोलियों के संवर्धन में भी प्रयत्न करना होगा। हिन्दी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. गोविंद प्रसाद वर्मा ने स्वागत-परिचय प्रस्तुत किया।

अतिथियों का स्वागत हिंदी विभाग के सह-आचार्य डॉ. अंजनी कुमार श्रीवास्तव ने किया| स्वागत-भाषण में डॉ. अंजनी श्रीवास्तव ने कहा कि, आज 21वीं सदी के बीस साल गुजर जाने के बाद विज्ञापन, बाजार, चुनाव आदि सभी क्षेत्रों में हिंदी का प्रचार-प्रसार बढ़ा है। आज के साहित्यकारों में उदय प्रकाश, मनीषा कुलश्रेष्ठ आदि ने सहित्य की भाषा के नवीन रूप को विकसित किया है।
भाषा एवं मानविकी संकाय के संकाय प्रमुख और हिन्दी के विभागाध्यक्ष प्रो राजेन्द्र सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। ई-संगोष्ठी का ओजस्वी संचालन हिंदी विभाग में सहायक आचार्य डॉ. गरिमा तिवारी ने किया।

इस एक दिवसीय ई-संगोष्ठी का संयोजन हिन्दी विभाग के सहायक प्राध्यापक श्री श्याम नंदन ने किया।
वेब संगोष्ठी के संरक्षण मंडल में मानविकी एवं भाषा संकाय के संकाय प्रमुख प्रोफेसर राजेंद्र सिंह, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफेसर आनंद प्रकाश, शिक्षा संकाय प्रमुख प्रोफेसर आशीष श्रीवास्तव, संस्कृति विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर प्रसूनदत्त सिंह, वाणिज्य विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर त्रिलोचन शर्मा, अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष डॉ विमलेश सिंह, हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अंजनी कुमार श्रीवास्तव एवं राम जयपाल महाविद्यालय, छपरा के हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर (डॉ) नागेंद्र कुमार शर्मा की सक्रिय उपस्थिति रही।
साथ ही कार्यक्रम से आयोजन समिति के सदस्य महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी बिहार के डॉ एम. विजय कुमार शर्मा, डॉक्टर भावनाथ पांडेय, डॉ परमात्मा कुमार मिश्र, डॉ अमित रंजन, डॉ सौरभ सिंह राठौर, डॉ दुर्गेश्वर सिंह, डॉ बबलू पाल, डॉ अतुल त्रिपाठी, डॉ बबीता मिश्रा एवं मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अजित कुमार सिंह भी जुड़े रहे।
समस्त तकनीकी संचालन विश्वविद्यालय की जन-संपर्क अधिकारी शेफालिका मिश्रातथा सिस्टम अनालिस्ट श्री.दीपक दिनकर ने अत्यंत कुशलतापूर्वक किया।इस एक दिवसीय राष्ट्रीय ई-संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों सहित तमाम शिक्षण संस्थानों से 2600 से अधिक गूगल मिट एवं विश्वविद्यालय के फेसबुक पृष्ठ से शिक्षक, शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *