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कोरोना की तरह ही टीबी भी संक्रमण संबंधी रोग, रहें सतर्क

• दो सप्ताह से अधिक खांसी टीबी के लक्षण
• पर्याप्त इलाज या टीकाकरण से इलाज सम्भव
• रोगियों को मिलती है सरकारी सहायता

कटिहार(बिहार)अगर किसी को 10 दिन से ज्यादा समय से खांसी हो रही हो या खांसी के साथ मुँह से खून निकल रहा हो तो यह टीबी यानी यक्ष्मा बीमारी के लक्षण हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए. कोरोना की तरह टीबी भी संक्रमण से होने वाली बीमारी है. यह बीमारी भी हवा के द्वारा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकती है जैसे छींकना एवं खाँसना. यह बीमारी शरीर में सबसे ज्यादा फेफड़ों पर असर करता है पर इसके अलावा अन्य अंग जैसे आंत(इंटेस्टाइन), मस्तिष्क, गर्भाशय, लीवर, किडनी, मुँह एवं गला भी इससे प्रभावित हो सकता है. इसलिए अगर किसी व्यक्ति को टीबी के लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे नजरंदाज नहीं करते हुए तुरंत चिकित्सक से सम्पर्क करना चाहिए। सही समय पर सही इलाज से इस बीमारी को हराया जा सकता है.

क्या है टीबी के लक्षण :

टीबी सबसे ज्यादा फेफड़ों को संक्रमित करता है. इसलिए इसकी शुरुआत सुखी खांसी से शुरू होती है. धीरे-धीरे खांसी के साथ ही मुँह से खून और बलगम भी निकलने लगता है. शरीर में बहुत ज्यादा पसीना आना शुरू हो जाता है. किसी भी मौसम में विशेष तौर पर रात के समय ज्यादा पसीना आता है. धीरे-धीरे शारीरिक वजन घटने लगता है. बहुत ही बुखार का होना, थकावट महसूस करना, सांस लेने में परेशानी होना, भूख नहीं लगना इत्यादि इसके लक्षण हो सकते हैं.

हो सकता है इलाज :

टीबी का इलाज बिल्कुल सम्भव है. सही समय पर रोगी को अपनी जांच करवानी चाहिए. इसका इलाज डॉट्स विधि से किया जाता है, जिसे डिरेक्टली ऑब्जर्वड ट्रीटमेंट शॉर्ट कोर्स कहा जाता है. मुख्यतः बलगम की जांच जिसे माइक्रोस्कोप से एएफबी बक्टेरिया को देखकर एवं सी.बी.नैट मशीन द्वारा इसका डाइग्नोसिस किया जाता है. इसके द्वारा पूरी तरह इलाज करवाने पर रोगी ठीक हो सकते हैं. पर इससे संक्रमित व्यक्ति को पूरी सावधानी बरतने का खयाल रखना जरूरी होता है. टीबी के रोगाणु संक्रमित व्यक्ति के छींकने या खाँसने के साथ-साथ थूकने पर भी आसपास के वातावरण में फैलने लगता है. नजदीकी व्यक्ति के उस वातावरण में साँस लेने से यह उसके शरीर में भी प्रवेश कर जाता है और उसे संक्रमित कर देता है. इसलिए वक्त रहते ही इसका इलाज जरूर करवाया जा जाना चाहिए.

टीबी रोगियों को सरकार द्वारा मिलता है सहयोग :

जिला टीबी नियंत्रण विभाग द्वारा क्षेत्र स्तर पर जाकर टीबी मरीजों की खोज की जाती है. सम्बंधित मरीज के मिलने पर उनकी स्थानीय स्तर पर जांच शुरू होती है. अगर व्यक्ति टीबी संक्रमित पाए जाते हैं तो उन्हें नियमित तौर पर अपनी जांच करवानी जरूरी होती है, क्योंकि समय रहते इस रोग से आसानी से निजात पाया जा सकता है. इसमें रोगियों के बेहतर पोषण के लिए सरकार द्वारा प्रति माह उन्हें 500 रुपये भी दिए जाते हैं. यह संक्रमित रोगियों को इलाज के लिए उ प्रेरित करने में सहायक होता है. इसके अलावा किसी भी अस्पताल या संस्थान में स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा सम्बंधित बीमारी की जानकारी नहीं उपलब्ध कराने की स्थिति में सरकार द्वारा उन्हें दंडित किए जाने का भी प्रावधान है. ऐसे व्यक्तियों को जुर्माने का साथ साथ छह महीने से दो साल तक के जेल भी हो सकती है.