प्रवासी मजदूर

मेहनत करना
क्या हाेता है,
तुम क्या जानाे
भूख से लड़ना
क्या हाेता है..
सुबह कमाए,
शाम काे खाए
पर हित कारण
प्राण गवाए
फिर भी सबकी सुनना
क्या हाेता है
तुम क्या जानाे
घर से निकले
बेघर हाेकर,
काम ढूंढते खाते ठाेकर
दर-दर भटक
ठाैर ना पाना
क्या हाेता है
तुम क्या जानाे
झुककर चलना,बेजत हाेना
नहीं भाग्य का राेना-राेना
कर्मशील बन
मेहनत करना
धर्म निभाना क्या हाेता है
तुम क्या जानाे

देशभक्ति का बिगुल
बजाने वालाें
हिंदू-मुस्लिम कर
भिड़ जाने वालाें
फर्ज निभाना क्या हाेता है
तुम क्या जानाे

समय जब संकट का आया
सहारा काेई नहीं पाया
औरताें,बच्चाें काे ले साथ
सफर मीलाें का पैदल नाप
घर काे जाना
क्या हाेता है
तुम क्या जानाे

मजदूर नहीं
निर्माता है वाे,
असली सुनाे
विधाता है वाे
कर लाे जय-जयकार
हाैसला जिसकाअपरमपार
मर्म जीवन का
क्या हाेता है
तुम क्या जानाे

मेहनत करना
क्या हाेता है,
तुम क्या जानाे
भूख से मरना
क्या हाेता है,
तुम क्या जानाे।

लेखक परिचय
अन्नु
एम.ए.-इतिहास, द्वितीय वर्ष
राजकीय महिला महाविद्यालय,सांपला हरियाणा

One thought on “प्रवासी मजदूर

  • May 29, 2020 at 7:04 pm
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    Beautiful ❤️

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