लोक शिकायत कोषांग के नोटिस पर जगा जयप्रकाश विश्वविद्यालय

छपरा जयप्रकाश विश्वविद्यालय अपने कारनामों से हमेशा सुर्खियों में रहता है।ताजा मामला पीएचडी की डिग्री से जुड़ा है। पीएचडी वायवा पास होने के बाद भी 2 वर्ष तक रिजल्ट जारी नहीं किया गया।राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग,जिला लोक शिकायत कोषांग और प्रमंडलीय आयुक्त के यहां वाद दायर करने के बाद प्रमंडलीय आयुक्त सह अपीलीय प्राधिकार,लोक शिकायत की नोटिस जारी होने पर 2 साल बाद डिग्री जारी की गई।पीड़ित शोधार्थी प्रमोद कुमार ने बताया कि लगभग 2 वर्ष पूर्व उनका पीएचडी का वायवा हुआ था परंतु कुलपति महोदय द्वारा उसका नोटिफिकेशन नहीं किया गया।

पीड़ित शोधार्थी प्रमोद कुमार

तब उन्होंने बाध्य होकर जिला लोक शिकायत निवारण कोषांग, छपरा में एक परिवाद दायर किया। उस परिवाद में उनकी जीत हुई और जिला लोक शिकायत पदाधिकारी ने उनकी डिग्री जारी करने का निर्देश विश्वविद्यालय को दिया। उनके द्वारा पीएचडी का नोटिफिकेशन करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को 1 महीने का समय दिया गया था। 1 महीने के पश्चात भी नोटिफिकेशन नहीं होने पर  कमिश्नर कार्यालय में अपील दायर की। अपील दायर करने के पश्चात कमिश्नर साहब के कार्यालय द्वारा विश्वविद्यालय को नोटिस भेजा गया।

जिसके आलोक में 2 वर्ष बाद 1 अगस्त 2019 को उनका नोटिफिकेशन किया गया है।उन्होंने बताया कि एक वाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में भी दायर किया था जिसमें आदेश पारित हुआ था कि 8 सप्ताह के अंदर परिवादी के कार्य को करके आयोग को भी सूचित करें तथा परिवादी को भी सूचित करें। महामहिम कुलाधिपति के यहां भी  तीन बार आवेदन दिया। जिसके प्रतिउत्तर में राजभवन से तीन पत्र विश्वविद्यालय को भेजे गए जिसमें स्पष्ट निर्देश था कि आवेदक के कार्य को करके आवेदक को तथा राजभवन को भी कृत कार्रवाई से अवगत कराएं। उन्होंने कहा कि बहुत ही संघर्षों के बाद मुझे यह उपाधि प्रदान की गई है।

यही नहीं आरटीआई से भी उन्होंने दो प्रश्न लोक सूचना पदाधिकारी, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा से करते हुए जबाब मांगा था, जिसकी समय सीमा समाप्त होने के पश्चात  अपील माननीय कुलपति महोदय सह प्रथम अपीलीय प्राधिकार जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा को आवेदन दिया। वहां से भी जवाब नहीं मिलने के पश्चात वाद अभी राज्य सूचना आयोग पटना में विचाराधीन/लंबित है।उन्होंने कहा कि सत्य परेशान हो सकता है, परंतु पराजित नहीं हो सकता।

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