समेकित उर्वरक विक्रेताओं के लिए पोषण प्रबंधन विषय पर प्रशिक्षण आयोजित

भगवानपुर हाट(सीवान)कृषि विज्ञान केंद्र के द्वारा 15 दिवसीय समेकित उर्वरक विक्रेताओं के लिए पोषण प्रबंधन विषय पर आयोजित प्रशिक्षण के 14वें दिन डॉ पुष्पा सिंह ,सहायक निदेशक प्रसार शिक्षा ,डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के द्वारा एफ वाई एम ,हरी खाद ,समृद्ध खाद एवं वर्मी कंपोस्ट का महत्व विषय पर विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने एफ वाई एम के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि एआइएम को फार्म यार्ड खाद कहा जाता है यह फार्म पर रहने वाले पशुओं के मल मूत्र उनके नीचे के विछावन और उनके खाने के बचे हुए व्यर्थ चारे के खाद को कहते हैं ।

यह पौधों के लिए सभी आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराता है साथ ही भूमि की भौतिक रचना में सुधार करता है यह किसानों को सबसे अधिक सरलता से प्राप्त हो जाती है। इसमें नाइट्रोजन 0.5 परसेंट फास्फोरस 0.25 परसेंट तथा पोटाश 0.5 परसेंट होता है इसके अतिरिक्त कैल्शियम मैग्नीशियम तथा सल्फर आदि पोषक तत्व भी होते हैं हरी खाद की उपयोगिता एवं महत्व पर बात करते हुए उन्होंने ढईचा मूंग सनई आदि को हरी खाद के रूप में प्रयोग करने के लिए कहा जिस में मिट्टी को कार्बन नाइट्रोजन तथा अन्य पोषक तत्व की उपलब्धता मिट्टी को मिलने की बात की ।

वर्मी कंपोस्ट की महत्वपूर्ण बात करते हुए उन्होंने केचुआ द्वारा बनाई खाद की जरूरत मिट्टी की संरचना सुधारने तथा पोषक तत्व मुख्यता सूक्ष्म पोषक तत्वों की मिट्टी में उपलब्धता बढ़ाने की बात कही। इस प्रशिक्षण में सद्दाम हुसैन, जुलुम पंडित,सचिन कुमार प्रसाद,अनिल कुमार सिंह ,उमेश प्रसाद सहित कुल 35 प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया।

कृषि विज्ञान केंद्र में चार नए वैज्ञानिकों ने अपना पदभार संभाला जिनमें डॉक्टर नंदिशा सी वी, विषय वस्तु विशेषज्ञ ,पौधा संरक्षण, डॉक्टर हर्षा बीआर ,विषय वस्तु विशेषज्ञ फसल उत्पादन मिस सरिता कुमारी, विषय वस्तु विशेषज्ञ गृह विज्ञान एवं डॉ जोना दाखो विषय वस्तु विशेषज्ञ उद्यान है । इनके केंद्र में उपस्थिति पर केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ अनुराधा रंजन कुमारी वैज्ञानिक इंजीनियर के बी क्षेत्री सहित सभी कर्मचारी खुश है ।केंद्र के सुचारू ढंग से चलाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान होगा।

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