रेडियो का सीधा जुड़ाव जनसरोकार से होता है- कमल शर्मा

मन्दसौर जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग, मन्दसौर विश्वविद्यालय द्वारा  सोमवार को रेडियो वृत्तचित्र, ड्रामा और फीचर पर दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें रेडियो की दुनियाँ में आवाज के जादूगर कहे जाने वाले, प्रसिद्ध रेडियो उद्घोषक कमल शर्मा ने देश भर से जुड़े प्रतिभागियों से को प्रशिक्षण दिया । कार्यशाला में देश भर के 60 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया जिसमें उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि प्रदेशों से प्रतिभागी जुड़े । कार्यशाला के पहले दिन रेडियो डॉक्यूमेंट्री और फीचर तथा दूसरे दिन रेडियो ड्रामा पर कार्यशाला आयोजित हुई । कार्यशाला का शुभारंभ मन्दसौर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शैलेन्द्र शर्मा के स्वागत उद्बोधन से हुआ । कार्यशाला में बोलते हुए डॉ शैलेन्द्र शर्मा ने कहा कि यह कार्यशाला मीडिया छात्रों के लिए सुनहरा अवसर है, वर्तमान परिस्थितियों में भी विभागीय कार्यशालाओं द्वारा विद्यार्थी नित नए क्षेत्र में बारे में सीख रहे हैं, और रेडियो के क्षेत्र के प्रसिद्ध व्यक्तित्व से रेडियो के बारे में सीखना स्वयं में ही बड़ा विषय है।
 कार्यशाला में मन्दसौर विश्वविद्यालय के डीन कर्नल आनंद कुमार मुख्य अतिथि के उपस्थित रहें । अपने उद्बोधन में कर्नल आनंद कुमार रेडियो और आम आदमी के मध्य जुड़े हुए रिश्तों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रेडियो हमारे जीवन में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रेडियो हमारे जीवन का एक अभिन्न मित्र रहा है और रहेगा ।

कार्यशाला में बतौर मुख्य वक्ता और प्रशिक्षक कमल शर्मा, आल इंडिया रेडियो मुंबई के उद्घोषक, उपस्थित रहे । अपने उद्बोधन में  मीडिया छात्रों को सम्बोधित करते हुए कमल शर्मा ने कहा कि रेडियो का सीधा जुड़ाव जन सरोकार से है। रेडियो पर व्यक्ति दिखाई नहीं देता, लेकिन सुनाकर ही वह अमिट छाप छोड़ सकता हैं। शर्मा ने रेडियो डॉक्यूमेंट्री व फीचर्स के बारे में विस्तृत रूप से चर्चा की। उन्होंने बताया कि शब्दों का प्रस्तुतिकरण इस शब्द के महत्व को ज़िंदा रखता है। इसलिए पहले शब्दों के अर्थों को समझना चाहिए फिर उनमें रमना चाहिए। बिन शब्दों के भावों के जाने बिना आप श्रोताओं के मन पर प्रभाव नहीं डाल सकते । वर्तमान समय मे साउंड एडिटिंग पर विचार प्रस्तुत करते हुए कमल शर्मा ने बताया कि अत्यधिक व अतिरिक्त संगीत वक्ता को मूल उद्देश्य से भटकाता हैं,  लेकिन आवश्यक ध्वनि व संगीत से निर्देशिक कौशल सामने आता हैं। शर्मा ने साउंड एडीटिंग सहित कई तकनीकी माध्यमों पर भी विस्तृत चर्चा की।
कार्यशाला में विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष कुमार जैसल कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि सीखने की इच्छाशक्ति को परिस्थितियां प्रभावित नहीं करती। हालात जो भी हो, एक विद्यार्थी को अपनी सीखने की ललक कभी भी कम नहीं करना चाहिए। मीडिया छात्रों के लिए यह कार्यशाला एक सुअवसर हैं जिसके द्वारा रेडियो से सबंधित कई बहुपयोगी जानकारियां अर्जित करेंगे। कार्यशाला में मंच संचालन विभाग के सहायक प्रोफेसर अरुण जैसवाल ने किया । श्री अरुण ने कहा कि आने वाले दिनों में भी विभवग ऐसी ही अन्य कार्यशालाएं आयोजित करता रहेगा ।  आभार ज्ञापन सहायक प्रोफेसर सुश्री सोनाली ने किया । कार्यशाला में मन्दसौर विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. शैलेन्द्र शर्मा, डीन प्रो. कर्नल आनंद कुमार, विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष कुमार जैसल, सहायक प्रो. अरुण कुमार जायसवाल, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के छात्र- छात्राओं सहित देश के कई मीडिया संस्थानों के छात्र व शोधकर्ताओं ने सहभागिता की। उक्त जानकारी पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा दी गई।

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