विश्व मातृभाषा दिवस के अवसर पर भोजपुरी संगोष्ठी का आयोजन

भगवानपुर हाट(सीवान)प्रखंड मुख्यालय में स्थित भगवानपुर महाविद्यालय भगवानपुर हाट के परिसर में रविवार को विश्व मातृभाषा दिवस के अवसर पर मूंगा लाल शास्त्री की अध्यक्षता में भोजपुरिया संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का आयोजन चौथे राष्ट्रीय भोजपुरी महोत्सव के बैनर तले की गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि जेड ए इस्लामिया कॉलेज सीवान के हिन्दी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अशोक प्रियम्बद ने संबोधित करते हुए कहा कि भोजपुरी की बुनियाद पर हीं हिंदी खड़ी है। भाषा के आधार पर 1956 में राज्यों का गठन हुआ था।भोजपुरी का विश्व में विशाल व समृद्धि साम्राज्य है, जिसकी विश्व ने जनसंख्या लगभग 25 करोड़ से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि हिन्दी भाषा का मूल स्रोत भोजपुरी हीं है। इसके बाद भी भोजपुरी आजतक विज्ञान का भाषा नहीं बन सका। उन्होंने चिंता प्रकट करते हुए कहा कि भोजपुरी का एक सर्वमान्य व्याकरण नहीं होने से क्षेत्रवार विभितताए पाई जाती हैं।जिसके कारण कोई सर्वमान्य स्वरूप विकसित नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि इस वैश्विक दौर में दुनिया भर की मातृभाषाओं के लुप्त होने का ख़तरा मंडराने लगा है। हर साल अनेक भाषाएं खत्म हो रहीं हैं। उन्होने चौथे राष्ट्रीय भोजपुरी महोत्सव के आयोजन को एक साहसिक व सराहनीय कदम बताया। मूंगालाल शास्त्री ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में कहा कि आज तक भोजपुरी को संविधान की आठवीं सूची में शामिल नहीं होने के पीछे जनांदोलन का विफल होने है। संयोजक डॉ. उमाशंकर साहू ने 12 मार्च से शुरू होने वाले तैयारी की रूपरेखा पटल पर रखी, जिसकी समिति द्वारा समीक्षा की गई। बैठक ने अधिवक्ता जयप्रकाश नारायण सिंह, वीरेन्द्र सिंह, अशोक राय, आनन्द प्रकाश पांडेय, वीरेन्द्र कुमार अभय, नागमणि शर्मा, आनंद प्रभाकर, अब्दुल कादिर, प्रदीप कुमार,अनिल कुमार गुप्ता सहित दर्जनों लोग शामिल थे।

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