नीति निर्माण में लोकतंत्र सबसे श्रेष्ठ है-प्रो. संजीव कुमार शर्मा

मोतिहारी(बिहार)स्वामी विवेकानंद सीरीज अंतर्गत चिंतनशील संवाद आत्म निर्भर भारत के द्वितीय चरण में शैक्षिक अध्ययन विभाग महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी बिहार , शिक्षाशास्त्र विभाग उत्तर पूर्वीय पर्वतीय विश्वविद्यालय(NEHU) मेघालय तथा शिक्षा विद्यापीठ केन्द्रीय विश्वविद्यालय तमिलनाडु के संयुक्त तत्वाधान में पांच दिवसीय सार्वजनिक नीति -2020 का आयोजन किया गया है । कार्यक्रम का शुभारम्भ कार्यक्रम की निर्देशिका आचार्य एस०सी०मोमिन , विभागाध्यक्ष, शिक्षाशास्त्र विभाग ( नेहू)के स्वागत भाषण से हुआ। ततपश्चात कार्यक्रम का विषय प्रवर्तन कार्यक्रम के सूत्रधार, निर्देशक आचार्य आशीष श्रीवास्तव , संकायाध्यक्ष शिक्षा विद्यापीठ मोतिहारी , बिहार ने प्रस्तुत किये। अपने संबोधन में कहा कि जो प्रजातंत्र सोचने में भ्रमित है , वह न तो विकास कर सकती है और न तो विकास के गति को बनाये रख सकती है । भारत जैसे विशाल राष्ट्र में जहां सामाजिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक विभिन्नताएं पाई जाती हो तो सामाजिक मुद्दों के लिए हर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व अनिवार्य हो जाता है । इसके बाद कार्यक्रम के निर्देशक आचार्य आर०कुमारवेल , संकायाध्यक्ष शिक्षा विद्यापीठ विश्वविद्यालय तमिलनाडु, कुलपति कामराज विश्वविद्यालय मदुरै का सानिध्य प्राप्त हुआ, जिसमें उन्होंने कहा कि सार्वजनिक नीति के समग्र समझ के लिए सार्वजनिक परिदृश्यों , एवं पर्यावरणीय शक्तियों के मध्य संयोजन का विश्लेषण करना चाहिए । कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि आचार्य जी० सिंगइया , प्रतिकुलपति नेहू, मेघालय का सानिध्य प्राप्त हुआ । उन्होंने कहा कि सार्वजनिक नीति किसी राजनीतिक प्रणाली का समग्र चित्रण करती है । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आचार्य संजीव कुमार शर्मा, कुलपति ,म०ग०के०वी०मोतिहारी बिहार का उदबोधन हुआ। जिसमें उन्होंने कहा कि नीति निर्माण में लोकतंत्र सबसे श्रेष्ठ है । लोकतंत्र से सत्ता का हस्तांतरण सरल एवं सहज हो जाता है और उन्होंने मेघालय , मोतिहारी, एव तमिलनाडु के त्रिकोण को एक मंच पर लाने के लिए आचार्य आशीष श्रीवास्तव के भगीरथ प्रयास की प्रशंसा किये । तथा मुख्य वक्ता के रूप में आचार्य कुमार सुरेश , राष्ट्रीय शैक्षिक एवं प्रशासन विश्वविद्यालय, न्यूपा का सानिध्य प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक नीति निर्माण में आर्थिक विकास ,समानता, स्वतंत्रता , आत्म निर्णय जैसे बड़े सिद्धान्तों को स्वीकार करना चाहिए । आचार्य नागराजू , समाजशास्त्र विभाग , हैदराबाद विश्वविद्यालय एवं आचार्य सुभाष चंद्र राय , एनसीईआरटी, शिलांग का ने शिक्षा के क्षेत्र में सार्वजनिक नीति के बारे में विस्तृत चर्चा से की । कार्यक्रम का सफल संचालन सह आचार्य डॉ मुकेश कुमार , कार्यक्रम, समन्वयक ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ पैथलोथ ओमकार , कार्यक्रम संयोजक ने किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय परिवार के साथ विभाग के सहायक आचार्य डॉ रश्मि श्रीवास्तव , डॉ मनीषा रानी तथा शोधार्थी गणेश शुक्ल , रंजय पटेल, अंगद सिंह, अलोकिता विशाल, इंदुबाला, सविता , मनीष, सुनील दुबे, विद्यार्थी कंचन, संजीव, नवीन, तूलिका, अंकित , नूतन सहित लगभग 200 प्रतिभागी पूरे भारत से वेब संगोष्ठी से जुड़ें थे ।

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