हकेंवि के छात्र मयंक ने विश्वविद्यालय के लिए विकसित किया ‘गेट पास मैनेजमेंट सिस्टम’

लॉकडाउन के बाद परीक्षा के लिए विश्वविद्यालय आने वाले विद्यार्थियों के लिए मददगार होगा यह सिस्ट


कुलपति ने बताया विद्यार्थियों के लिए उपयोगी


हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि), महेंद्रगढ़ में मास्टर ऑफ कम्प्यूटर एप्लिकेशन (एमसीए) के छठे सेमेस्टर में अध्ययरत छात्र मयंक कुमार ने एक ऐसी तकनीकी सुविधा विकसित की है जोकि लॉक डॉउन के समाप्त होने के बाद परीक्षा के लिए विश्वविद्यालय पहुँचने वाले विद्यार्थियों के लिए उपयोगी होगी। ‘गेट पास मैनेजमेंट सिस्टम’ नामक इस सिस्टम की कार्यप्रणाली को जानने के बाद विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. आर.सी. कुहाड़ ने इसे उपयोगी बताया और कहा कि हमारी कोशिश है कि तकनीक के माध्यम से विद्यार्थियों को अधिकतम राहत प्रदान की जाए।
मयंक का कहना है कि कोविड-19 के बाद शिक्षण संस्थानों और विद्यार्थियों को आने वाली विभिन्न परेशानियों को दूर करने में यह सिस्टम सहायक सिद्ध होगा। मयंक ने बताया कि ‘गेट पास मैनेजमेंट सिस्टम‘ एम का यूआरएल विश्वविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों को ई-मेल या अन्य ऑनलाइन माध्यम द्वारा भेजा जाएगा। इसके बाद विद्यार्थियों को इस एप पर अपना पंजीकरण करवाना होगा। जिसमें कोविड मैनजमेंट सिस्टम के संबंधित विभिन्न सवालों के जवाब देने के बाद विद्यार्थी को सरकारी अस्पताल द्वारा जारी मेडिकल सर्टिफिकेट सबमिट करना होगा। इसके पश्चात विद्यार्थी द्वारा डाला गया डेटा विश्वविद्यालय के संबंधित शैक्षणिक विभाग के पास सीधे चला जाएगा। डेटा प्राप्त होने पर उसका विश्लेषण किया जाएगा और उसके पश्चात संबंधित विभाग उस विद्यार्थी को परीक्षा का शेड्यूल उपलब्ध करवाएगा। तत्पश्चात विद्यार्थी का गेट पास बनेगा और विद्यार्थी का विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश सुनिश्चित हो सकेगा।
इस सिस्टम में सभी विद्यार्थियों के डाटा का राज्यवार व जोनवार भी विश्लेषण किया जा सकेगा, जो विश्वविद्यालय को भविष्य में विद्यार्थियों से संबंधित योजनाएं बनाने में मददगार साबित होगा। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.सी. कुहाड़ ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थी मंयक द्वारा किए गए प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय इस सिस्टम को आवश्यक सुधारों के साथ लागू करने का प्रयास किया जा रहा है। न सिर्फ हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय बल्कि यह सिस्टम अन्य शैक्षणिक संस्थानों व उनमें अध्ययरत विद्यार्थियों के समक्ष आने वाली परेशानियों को दूर करने में सहायक साबित हो सकता है।

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