राजद का अतिपिछड़ा जगाओ, बिहार बचाओ!कोरोना महामारी के कारण अगले सूचना तक स्थगित

छपरा(बिहार)राष्ट्रीय जनता दल अतिपिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष सह विधानपरिषद सदस्य प्रो रामबली सिंह चंद्रवंशी के नेतृत्व में ‘बिहार प्रवास कार्यक्रम’ तय किया था।
यह कार्यक्रम 07.07.2020 से 08.08.2020 के बीच चार चरणों में विभाजित किया गया था। यह कार्यक्रम वास्तव में कार्यकर्ता सम्मेलन था जिसमें पंचायत से लेकर प्रदेश तक के कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों का मिलन सह संवाद सम्मेलन था। प्रवास कार्यक्रम का ध्येय वाक्य था- अतिपिछड़ा जगाओ, बिहार बचाओ!

कार्यक्रम में उचित दूरी, मास्क एवं सेनेटाइजर आदि का पूरा ख्याल रखा जा रहा था लेकिन जिस तीव्रता के साथ कोरोना का प्रकोप फैल रहा है, वह अत्यंत भयावह है। चुनाव और सत्ता के चक्कर में आम जनता को महामारी में नहीं झोंका जा सकता है। इसलिए राष्ट्रीय जनता दल अतिपिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ ने आज फैसला किया है कि शेष सभी जिलों का दौरा सामान्य स्थिति के बाद ही किया जाएगा, अर्थात ‘बिहार प्रवास कार्यक्रम’ अगली सूचना तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।

अफ़सोस मात्र चार जगह कार्यक्रम हो पाया-
07.07.2020 को मुजफ्फरपुर
08.07.2020 को मोतिहारी
09.07.2020 को बगहा एवं बेतिया में….

बिहार में कोरोना जिस तरह फैल रहा है, वह अत्यंत भयावह है। इस हालात में भला चुनाव कैसे हो सकता है। आखिर कुर्सी के लिए आम जनता को काल के गाल में धकेलना कहाँ तक जायज है। यह तो आ बैल मुझे मार जैसी स्थिति है।

हमारे नेता माननीय तेजस्वी प्रसाद यादव (बिहार विधानसभा प्रतिपक्ष नेता) ने साफ शब्दों में कहा है कि यह समय चुनाव कराने का नहीं बल्कि जनता की स्वास्थ्य सुविधाओं का ख्याल रखने का है। अफ़सोस सत्ता रूढ़ पार्टियां महामारी में ही चुनाव कराना चाहती हैं क्योंकि वे सत्ता मोह में मदमस्त हैं। चुनाव आयोग को भी समय पर ही चुनाव कराने की चिंता है, उसे भी आम जनता के स्वास्थ्य की चिंता नहीं है।

बहरहाल राष्ट्रीय जनता दल की भरपूर कोशिश रहेगी कि जनता का स्वास्थ्य पहले चुनाव बाद में हो। फिलहाल विकट स्थिति से निपट लिया जाए फिर चुनाव तो होता रहेगा…. जनता से कुर्सी है न कि कुर्सी से जनता है।

सरकार संवेदनशील नहीं हुई तो फिर जनता भी जनादेश में जना देगी……. सिर्फ सत्ता नहीं, सुविधा भी चाहिए।उक्त आशय की जानकारी डॉ दिनेश पाल
प्रदेश प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी राष्ट्रीय जनता दल अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ ने दी।

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