बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की 129 वी जयंती का आयोजन ऑनलाइन किया गया

छपरा (सारण) भारतीय संविधान के निर्माता देश रत्न बाबा साहब भीमराव अंबेडकर 129 वी जयंती वैश्विक महामारी कोरोना के चलते सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए छपरा शहर के महमूद चौक, कटहरी बाग एवं‌ ब्रह्मपुत्र मोहल्ले से फेसबुक लाइव के माध्यम से ऑनलाइन आयोजित किया गया ।सर्वप्रथम बाबा साहब के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धा पूर्वक याद किया गया इस अवसर पर फेसबुक लाइव में बोलते हुए बिहार विधान परिषद के सदस्य डॉ. वीरेंद्र नारायण यादव ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर युग दृष्टा थे और उनके कहे गए समस्त कार्य आज हमारे समक्ष साकार रूप ले रहे हैं, उन्होंने आरक्षण और दलितों की समस्या को लेकर पूना पैक्ट में गांधी जी को इस बात के लिए बाध्य कर दिया कि देश की आजादी में बहुसंख्यक दलितों और पिछड़ों को बिना जोड़े कामयाबी हासिल नहीं की जा सकती है ।उन्होंने कहा कि दलित समस्या में सामाजिक, राजनैतिक एवं सांस्कृतिक रूप से पिछड़े समुदाय को जब तक समानता का अधिकार नहीं मिलेगा तब तक लोकतंत्र उनके लिए बेमानी है।श्री यादव ने बताया कि इन्हीं विचारों के कारण बाबासाहेब आज भी हमारे बीच प्रासंगिक बने हुए हैं।


ऑनलाइन फेसबुक पर अपना विचार व्यक्त करते हुए डॉ. लाल बाबू यादव ने कहा कि भारत की आजादी के पूर्व और स्वतंत्र्योत्तर भारत में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की मेधा योग्यता और कार्यक्षमता की बराबरी करने वाला कोई भी व्यक्ति आज तक पैदा नहीं हुआ, स्वयं अमेरिका में जहां उन्होंने विद्याधन किया था उस शिक्षण संस्थान ने अपने 100 वर्ष के इतिहास में बाबा साहेब को अपना सर्वोत्तम छात्र माना।यह डॉ. अंबेडकर के लिए तथा उनके समर्थकों के लिए प्रेरणा स्रोत है। हिंदी के युवा प्राध्यापक तथा नंदलाल सिंह जैतपुर दाउदपुर महाविद्यालय में पदस्थापित डॉ. दिनेश पाल ने उदाहरण सहित बताया कि डॉक्टर अंबेडकर के जीवन काल में उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, वे जिस महार जाति से आते थे उसे गर्दन में थूकने के लिए बर्तन बांध कर चलना पड़ता था क्योंकि उनके छूने से सड़क मार्ग अपवित्र हो जाता था ।

बड़ौदा महाराज की सेवा में भी बाबासाहेब सामाजिक एवं नस्लीय भेदभाव के शिकार रहे, परंतु भारत में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और अन्य राजनीतिक संरचनाओं के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
हमें उनके जन्म जयंती पर इस बात का संकल्प लेना चाहिए कि उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाएंगे और उसके आधार पर एक नए भारत का निर्माण करेंगे।

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