सूक्ष्मजीवविज्ञान के प्रति जागरूकता जरूरी – प्रो. कुहाड़

हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि), महेंद्रगढ़ में सूक्ष्मजीवविज्ञान के क्षेत्र में जारी विकास पर सोमवार 29 जुलाई, 2019 को परिसंवाद का आयोजन किया गया। इस परिसंवाद का आयोजन एसोसिएशन ऑफ माइक्रोबायोलॉजिस्ट ऑफ इंडिया के सहयोग से विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के सूक्ष्मजीवविज्ञान विभाग के द्वारा किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. सी. कुहाड़ समारोह के मुख्य अतिथि रहे। प्रो. कुहाड़ ने अपने भाषण में दैनिक जीवन में सूक्ष्मजीवविज्ञान के सामाजिक लाभों और इसके महत्व पर जोर देते हुए कहा कि आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से सूक्ष्मजीवों की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में विश्वविद्यालय और स्कूली छात्रों को संवेदनशील बनाने की आवश्यकता है। यह विषय जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में जनोपयोगी है इसलिए इसके प्रति व्यापक जागरूकता जरूरी है।


इस अवसर पर उपस्थित दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. रूप लाल; पंजाब विश्वविद्यालय के प्रो. प्रिंस शर्मा और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. जे.एस. विर्दी जैसे भारत के प्रख्यात सूक्ष्म जीवविज्ञानी प्रतिभागियों के लिए अपने ज्ञान और अनुभव के साथ सामने आए। इससे पहले स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के अधिष्ठाता प्रो. सतीश कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया और वक्ताओं का परिचय कराया।


सूक्ष्मजीवविज्ञान के प्रमुख डॉ. गुंजन गोयल ने बताया कि इस परिसंवाद में प्रो. रूप लाल ने रिफैम्पिसिन और इसकी व्युत्पत्ति के सूक्ष्मजीव विज्ञानी उत्पादन पर अपने शोध पर प्रकाश डाला, जबकि प्रो. प्रिंस शर्मा ने रिवर्स वैक्सीनोलॉजी पर अपना शोध प्रस्तुत किया, जो बहु-औषध प्रतिरोध के कारण उभरती बीमारियों के लिए टीकों के विकास का नया तरीका है।

अंतिम सत्र में प्रो. जे.एस. विर्दी ने अपने अनुभव साझा किए और छात्रों को समाज की जरूरतों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। जैव रसायन विभाग की प्रमुख प्रो. नीलम सांगवान ने धन्यवाद ज्ञापन किया। परिसंवाद में प्रो. सारिका शर्मा, डॉ. सुरेंद्र सिंह, डॉ. कश्यप दुबे, डॉ. बिजेंद्र, डॉ. पवन मौर्य, डॉ. जितेंद्र कुमार सैनी, डॉ. पूजा, डॉ. अविजित, डॉ. सोमवीर, डॉ. सविता, डॉ. अविजित, डॉ. पीयूष, डॉ. विकास सहित भारी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया।

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