अवसरों का सृजन करें, जोखिमों के लिए तैयार रहें- सत्य पाल मलिक

हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि), महेंद्रगढ़ के छठे दीक्षांत समारोह का आयोजन शुक्रवार 28 फरवरी को हुआ। इस अवसर पर गोवा के राज्यपाल माननीय सत्य पाल मलिक मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में हरियाणा के पूर्व शिक्षा मंत्री श्री रामबिलास व विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. वेदप्रकाश दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में विश्वविद्यालय का कुलगीत भी पहली बार गाया गया।

विद्यार्थियों, शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि गोवा के राज्यपाल श्री सत्य पाल मलिक ने कहा कि आज हम स्नातकों की शैक्षणिक उपलब्धियों के गौरव का उत्सव मना रहे हैं इसलिए आज का दिन विद्यार्थियों, उनके परिवारों व अध्यापकों के लिए गौरवशाली दिन है। उन्होंने कहा कि युवा एक राष्ट्र के भविष्य के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। विद्यार्थियों को प्राप्त उपाधि एक ऐसा उपकरण है जिसके द्वारा वह मानवता के विकास में योगदान दे सकेंगे। राज्यपाल महोदय ने कहा कि विश्वविद्यालय को देखकर विश्वविद्यालय के सक्रिय व गतिशील नेतृत्व, अध्यापकों व विद्यार्थियों के परिश्रम अंदाजा सहज ही लगया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने केवल शैक्षणिक मोर्चे पर अपनी छाप छोड़ने मे कामयाब रहा हैै अपितु सामाजिक मोर्चे पर भी उतनी की मेहनत से काम कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में सफलता हासिल करने के लिए हमेशा अपने आप को अपडेट रखो, उत्तम शिक्षा व उत्तम व्यवहार ग्रहण करो, नए अवसरों का सृजन करो तथा जोखिम उठाने से मत कतराओ। इस अवसर पर श्री सत्य पाल मलिक ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.सी. कुहाड़ की प्रशंसा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की प्रगति से स्पष्ट है कि इसके निर्माण में कितनी ऊर्जा के साथ कार्य किया गया है। इस मौके पर श्री सत्य पाल मलिक ने खेल परिसर से संबंधित निर्माण कार्य का शिलान्यास भी किया।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के रूप उपस्थित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. वेद प्रकाश ने विद्यार्थियों को देश का भविष्य बताया और कहा कि आपके नेतृत्व में भी देश प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा। इस मौके पर उन्होंने अपने संबोध में विद्यार्थियों को सफलता के पाँच मंत्र- परिश्रम, अनुशासन, सीखने की इच्छा, प्रतियोगी भावना और सफलता की चाह के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि 19वीं सदी मे कोयले का महत्त्व था, 20वीं सदी में तेल का और 21वीं सदी आइडियाज की सदी है। इसलिए अपनी सोच को देश के विकास में लगाए। प्रो. वेद प्रकाश ने शिक्षा के विकास के लिए शिक्षकों व विद्यार्थियों सहित राजनीतिक सोच व नौकरशाही के तालमेल पर भी विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि इनके साझा प्रयासों से ही शैक्षणिक संस्थानों का विकास सम्भव है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि हरियाणा के पूर्व शिक्षा मन्त्री राम बिलास शर्मा ने एक जीवन एक मिशन का मन्त्र दिया और कहा कि युवाओं को अपने व देश के लिए जीने की चाह रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मतलब सशक्तिकरण के लिए तत्पर रहना है और इस दिशा में हमें लगातार प्रयासरत रहना चाहिए। युवा पीढ़ी पर देश के विकास का भार है और उसे अपने इतिहास से सबक लेते हुए देश की प्रगति में हिस्सा लेने के लिए तत्पर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को यदि सफल होना है तो सतत प्रयत्न के लिए तैयार रहना होगा। आज यह महत्त्वपूर्ण नहीं है कि आपने क्या सीखा है बल्कि महत्त्वपूर्ण यह है कि आपकी सीख के आगे क्या है। आगे बढ़ें, ज्ञान को जोड़े, अनुभव को जोड़े और नवाचार को बढ़ावा दें। 

इससे पूर्व विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.सी. कुहाड़ ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि का उनकी उपस्थिति के लिए हृदय से आभार प्रकट किया। इस अवसर पर कुलपति ने डिग्री पाने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। कुलपति ने इस अवसर पर बताया कि किस तरहे से विश्वविद्यालय लगातार प्रगति के पथ पर अग्रसर है।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय को पिछले एक वर्ष चार नई परियोजनाएं और एक परामर्श परियोजना मिली। इन नई अनुसन्धान परियोजनाओं के साथ प्रायोजित अनुसन्धान परियोजनाओं का कुल मूल्य 900.49 लाख रूपये हो गया है। पिछले वर्ष विश्वविद्यालय के संकाय संदस्यों ने 11 प्रसिद्ध पुरस्कार प्राप्त किए। वर्ष 2019 विश्वविद्यालय  के विभिन्न कार्यक्रमों के 213 विद्यार्थियों ने यूजीसी-सीएसआईआर (नेट/जेआरएफ) और गेट की परीक्षा उत्तीर्ण की। प्रो. कुहाड़ ने बताया कि विश्वविद्यालय में मानव संसाधन विकास मंत्रालय की योजना पंडित मदन मोहन मालवीय नेशनल मिशन ऑन टीचर्स एंड टीचिंग के अन्तर्गत नेशनल रिसोर्स सेन्टर (एनआरसी) कार्यरत है, जिसके माध्यम से शिक्षकों के लिए वार्षिक रिफ्रेशर पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसी तरह विश्वविद्यालय को एन्वायरमेंटल माइक्रोबायोलॉजी में विषय आधारित नेटवर्क विकसित करने की जिम्मेदारी भी मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से प्रदान की गई है।

विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किए गए मूक पाठ्यक्रम को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की एकेडमिक एडवाइजरी काउंसिल ने 5 में से 4.5 रेटिंग प्रदान की है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय समुदाय के सभी सदस्यों के कठिन प्रयासों के का ही परिणाम है कि हम विश्वविद्यालय में नए शिक्षक शामिल कर पाएं। विश्वविद्यालय में संसाधनों के स्तर पर जारी प्रगति का ब्यौरा भी कुलपति ने पेश किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में अतिथि गृह, आवास परिसर, हेल्थ सेन्टर, पुरूष एवं महिला छात्रावास व खेल सुविधाओं आदि के निर्माण से संबंधित ढ़ांचागत विकास का कार्य जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।

विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. पी.एल चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में ‘तैत्तिरीय उपनिषद्‘ में वर्णित दीक्षा मन्त्र का उच्चारण कर उपाधि प्रदान की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों द्वारा पहनी गई वेशभूषा हमें भारतीय परम्परा व संस्कृति की याद दिलाती है और यह विश्वविद्यालय के इतिहास में विशिष्ट दिन है। कुलाधिपति ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.सी. कुहाड़ की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि विश्वविद्यालय प्रो. कुहाड़ के नेतृत्व में प्रगति के पथ पर अग्रसर है। कुलाधिपति ने दीक्षांत समारोह के अंत में मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि का आभार व्यक्त किया और उपाधिधारकों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।

विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह के विश्वविद्यालय का कुलगीत भी संगीत के साथ गाया गया। यह पहला मौका था जब कुलगीत के माध्यम से दीक्षांत समारोह का शुभारम्भ हुआ। दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय में कार्यकारी परिषद, शैक्षणिक परिषद व विश्वविद्यालय की कोर्ट के सदस्यों के अलावा हकेंवि के पूर्व कुलपति मेजर जनरल (डॉ.) रणजीत सिंह, विभिन्न पीठों के अधिष्ठाता, कुलसचिव रामदत्त, परीक्षा नियंत्रक डॉ. विपुल यादव, वित्त अधिकारी श्री मनोरंजन त्रिपाठी, विभागों के विभागाध्यक्ष परम्परागत परिधानों में उपस्थित रहे।

643 को मिली डिग्री व 11 को स्वर्ण पदक

हकेंवि के छठे दीक्षांत समारोह में कुल 643 विद्यार्थियों व शोधार्थियों को पीएच.डी., एम.फिल. व स्नातकोत्तर की डिग्री प्रदान की गई। पीएच.डी डिग्री पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या 10 रही तो 06 विद्यार्थियों को एम.फिल. और 627 को स्नातक व स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त हुई। जहां तक स्वर्ण पदक पाने वाले विद्यार्थियों की बात है तो इस बार विश्वविद्यालय की ओर से 11 विद्यार्थियों को उनके उम्दा प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।

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