नफरत भेदभाव और हिंसा ही क्या हमारे राजनीति जीवन का मुख्य हिस्सा है?

आज इलेक्ट्रॉनिक मीडिया टेलीविजन सोशल मीडिया मोबाइल प्रिंट मीडिया अखबार पत्रिकाएं इनमें से किसी को अध्ययन करके देखें सब का समाचार नफरत हिंसा बलात्कार गैर जिम्मेदाराना राजनीति पर आधारित समाचार देखने और पढ़ने को मिलते हैं। ऐसा लगता है इस देश में दो चार लेखकों एक दो टीवी चैनलों को अपवाद मान लिया जाए तो लगभग 95 प्रतिशत लेखक प्रिंट मीडिया समाचार पत्र पत्रिकाएं में नफरत हिंसा भेदभाव बलात्कार धार्मिक उन्माद जैसे विषय वस्तु पर ही लेखनी चला रहे हैं और चैनलों पर बहस भी कर रहे हैं जिसके कारण देश की 95% जनता चाहे वह शिक्षित हो या अशिक्षित इन सभी का मस्तिष्क भी वैसे ही विघटनकारी समाचारों को देखने पढ़ने तथा सोशल मीडिया में पोस्ट करने में ज्यादा दिलचस्पी ले रही है। इसका दुष्परिणाम भारत में बहुत ही विघटनकारी साबित होने जा रहा है जिस देश की 95% जनता दिग्भ्रमित हो जाए सच्चाई से दूर हो जाए ना समाज शास्त्र को समझ सके ना अर्थशास्त्र ना राजनीति शास्त्र को को समझ सके और ना धर्म शास्त्र को समझ सके तो क्या यह नहीं मान लिया जाए की देश की 95% जनता विवेक हीनता की तरफ जा रही है।

और विवेक हीन मनुष्य पशु के समान हो जाता है जिसे सही और गलत का निर्णय लेने की क्षमता नहीं रह जाती है । अगर सही में देश के 95 % जनता में विवेक हीनता आ जाए तो क्या उस देश का विकास होगा या विनाश होगा ? जो लोग देश की 95% जनता को विवेक हीनता की गर्त में पहुंचा रहे हैं वे धर्म और राजनीति के ठेकेदार लगते हैं । उन्होंने बहुत ही गहरी साजिश रची है ।आज हम सभी देशवासियों को धर्म और राजनीति के ठेकेदारों को पहचानना होगा एक धर्म के लोगों को दूसरे धर्म के लोगों से लड़ा रहे हैं । इंसानों से इंसानों का कत्लेआम करवा रहे हैं । धर्म के ठेकेदार धर्म स्थलों में बैठकर एयर कंडीशन में ऐसो आराम कर रहे हैं। राजनीति के ठेकेदार सत्ता का सुख भोग रहे हैं और हम सभी इस देश के 95 % भोली-भाली जनता धर्म और जाति के बीच का नफरत पाले हुए शक और नफरत की दृष्टि से देखकर हिंसा भी कर रहे हैं । धर्म और राजनीति के ठेकेदार और उनका परिवार ऐसो आराम की जिंदगी जी रहा है तरक्की कर रहे है । हमें ऐसे षड्यंत्र को समझते हुए अपनी मानसिक संतुलन को बनाए रखने की जरूरत है हमें अपना नजरिया और दृष्टिकोण बदलना होगा हमें नफरत हिंसा को त्यागना होगा. हमें ऐसे 95 प्रतिशत समाचार पत्रों पत्रिकाएं टीवी चैनलों लेखकों से सावधान रहना होगा। इनका लेख पढ़ने ऐसे टीवी देखने का सामूहिक बहिष्कार करना होगा । सोशल मीडिया के द्वारा धर्म के ठेकेदारों और राजनीति के ठेकेदारों द्वारा भेजी जा रहे पोस्ट का फॉरवर्डिंग करना बंद करें और जो इस तरह का भ्रम नफरत वाला पोस्ट करता हो उसे चेतावनी दें ।

अगर इस प्रकार का पोस्ट दोबारा करेगा तो उसके विरुद्ध आप कानूनी कार्रवाई करेंगे । पोस्ट करने वाला आपका मित्र संबंधी भी हो सकता है । क्योंकि पंचानवे परसेंट विवेक हीनता वाली श्रेणी में यह भी हो सकते हैं इसलिए इन्हें प्रेम भाव के साथ चेतावनी भी दें। कुछ समय के लिए आपके अपनों को तो बुरा लगेगा लेकिन इससे आपका देश बच जाएगा।सोशल मीडिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रिंट मीडिया

में 5 % ही सही ईमानदार और निर्भीक लेखको टीवी के समाचार वाचकों का सम्मान करें जैसे एनडी टीवी और समाचार वाचक एंकर रवीश कुमार का विश्व स्तर पर सम्मान हुआ।
शांति और सद्भावना से संबंधित देश प्रेम से ओतप्रोत परिवार समाज और देश के लिए प्रेरणादायक विचार किसी को या किसी ग्रुप में फॉरवर्ड करें । हम सभी एक इंसान हैं, इंसानियत ही हमारा मजहब है। हमें किसी व्यक्ति या किसी के धर्म से नफरत नहीं करना है आज से हम सभी प्रतिज्ञा लेते हैं । क्योंकि मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर करना हम सभी भारतीय हैं । भारतीयता ही पहचान है हमारा ।क्योंकि जो सबसे प्यारा है ,भारत देश हमारा है ।
लेखक बिक्रम चौधरी (इस लेख में जो भी विचार है वह लेखक का निजी विचार है इससे गौरीकिरण न्यूज़ पोर्टल का कोई सम्बन्ध नहीं है )

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