भाषा सेतु कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ : प्रो राममोहन पाठक

दिल्ली:भारतीय भाषाओं के बीच सार्थक संबंधों के माध्यम से देश में राष्ट्रीय एकता के सूत्रों को सुदृढ़ करने के लिए दक्षिण भारत के पांच राज्यों –तमिलनाडु, आंध्र, तेलंगाना, केरल तथा कर्नाटक राज्यों में ‘भाषा सेतु’कार्यक्रम का दिल्ली में शुभारंभ किया गया है। महात्मा गांधी द्वारा स्थापित 100 वर्ष प्राचीन प्रतिष्ठित हिन्दीसेवी संस्था – दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा के निवर्तमान कुलपति प्रो. राममोहन पाठक द्वारा प्रस्तावित ‘भाषा सेतु’ कार्यक्रम के माध्यम से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच परस्पर अकादमिक संबंध और भारतीय भाषाओं के संवर्धन की योजनाओं पर दक्षिण और उत्तर भारत की संस्थाएं तथा विद्वान कार्य करेंगे। उक्त कार्यक्रम को वाराणसी स्थित कांची कामकोटि पीठ मठ का भी सहयोग एवं आशीर्वाद प्राप्त है। मठ के प्रमुख श्री सुब्रह्मण्य ‘मणि’ ने इस योजना का स्वागत करते हुए काशी और दक्षिण में योजना को मठ का सहयोग प्रदान करने की अनुशंसा की है। ‘भाषा सेतु’ कार्यक्रम के क्रियान्वयन एवं सफलता के लिए तमिलनाडु हिन्दी अकादमी, चेन्नई, शारदा हिन्दी महाविद्यालय कडपा (आंध्र), हिन्दी प्रचार सभा, हैदराबाद (तेलंगाना), केरला हिन्दी प्रचार सभा, त्रिवेन्द्रम (केरल) तथा पुष्प हिन्दी विद्यालय, मैसूर (कर्नाटक) नोडल संस्था के रूप में चिन्हित की गई हैं।दक्षिण में हिन्दी सेवा कार्यकाल के बाद काशी लौटे प्रोफेसर राममोहन पाठक ने बताया कि प्रारंभ में ‘भाषा सेतु’ कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तर – दक्षिण के भाषा विद्वानों तथा कलाकारों की यात्रा, व्याख्यान, चर्चा सत्र और कार्यशालाओं के आयोजन उत्तर भारत और दक्षिण भारत के नगरों में आयोजित होंगे। कोविड – 19 संबंधी प्रतिबंध पूर्णरूप से समाप्त होने के बाद 10 चयनित विद्वान और कलाकार उत्तर के राज्यों से दक्षिण भारत के पांचों राज्यों की यात्रा पर जायेंगे और इसके बाद दक्षिण के विद्वान कलाकार उत्तर भारत की यात्रा पर आयेंगे। केन्द्र सरकार की संबंधित योजनाओं के अंतर्गत ये कार्यक्रम सम्पन्न होंगे।प्रो. पाठक ने बताया कि दिल्ली के विज्ञान भवन में दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा के आयोजित शतमानोत्सव कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द तथा ‘सभा’ के दीक्षान्त समारोह (चेन्नई) में
तत्कालीन विदेश मंत्री और प्रख्यात हिन्दी एवं भारतीय भाषा समर्थक श्रीमती सुषमा स्वराज के प्रेरक उद्बोधन में उत्तर भारत में दक्षिण भारतीय भाषाओं के शिक्षण – प्रशिक्षण –अध्यापन प्रारंभ किये जाने पर बल दिया गया था। इसे कार्यरूप में परिणत करते हुए उत्तर भारत में दक्षिण की तमिल, तेलुगु, मलयालम एवं कन्नड़ भाषाओं के अल्पकालीन एवं दीर्घकालीन शिक्षण – प्रशिक्षण के कार्यक्रम प्रारंभ किये जायेंगे। चेन्नई में उत्तर भारत के विद्वानों के आदान – प्रदान और सम्मान की योजना का शुभारंभ हाल ही में तमिलनाडु हिन्दी अकादमी के तत्वावधान में हो चुका है।‘भाषा सेतु’ कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तर और दक्षिण भारतीय भाषाओं की पुस्तकों को पाठकों एवं विद्यार्थियों को उपलब्ध कराये जाने के लिए पुस्तकालयों की स्थापना की जायेगी। इन पुस्तकालयों में पुस्तकों के अतिरिक्त डिजिटल रूप में भी पुस्तक संग्रह उपलब्ध होंगे। हिन्दी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ तथा मलयालम भाषाओं के परस्पर अनुवाद की महत्वाकांक्षी योजना भी ‘भाषा सेतु’ कार्यक्रम का अंग होगी।

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