‘पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर और ब्लारिस्तान: भारत का अभिन्न अंग’ विषयक एमजीसीयूबी में राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का हुआ आयोजन

पाकिस्तान अपनी बर्बादी खुद लिख रहा है: इंद्रेश कुमार

पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर सामरिक और सांस्कृतिक दृष्टि भारत का अभिन्न अंग: पी. स्टोबडन

मोतिहारी(बिहार)महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविधालय बिहार के जनसम्पर्क प्रकोष्ठ के द्वारा ‘पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर और ब्लारिस्तान: भारत के अभिन्न अंग’ विषय पर केन्द्रित एक दिवसीय राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने किया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. शर्मा ने कहा कि इस तरह के राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रित समसामयिक विषय पर चर्चा के लिए एवं जनाकांक्षाओं के बीच ले जाने के लिए सदैव तैयार हैं। इस महत्वपूर्ण विषय को विश्वविद्यालय और अधिक विस्तार के साथ चर्चा के लिए कार्यक्रम करने को प्रतिबद्ध है। प्रो. शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में हमें सचेत रहने की जरूरत है।

वेब संगोष्ठी के मुख्य अतिथि राष्ट्रवादी विचारक श्री इन्द्रेश कुमार ने कहा कि पाक अधिकृत कश्मीर पर पाकिस्तान का अवैध कब्जे है जो भारत का अभिन्न हिस्सा है। सबसे ऊंचे जगह पर होने से इसका सामरिक महत्व है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने चीन के साथ हाथ मिलाकर अपनी बर्बादी की पटकथा स्वयं लिख दी हैं। श्री इन्देश ने कहा की अब यह नारा देने और जनता में प्रसारित करने का वक्त है कि- ‘पाकिस्तान शर्म करो, शर्म करो! पीओके जम्मू-कश्मीर खाली-खाली करो! पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर हमारा है, हमारा है! साथ ही उन्होंने कहा कि एक देश, एक जन्म, एक झंडा को अपनाने की दिशा में जो काम आदरणीय नरेंद्र मोदी की सरकार ने किया हैं, वह अतुलनीय है।

विशिष्ट अतिथि के रूप में क्रिगिस्तान गणराज्य के पूर्व राजदूत प्रो. पी. स्टोबडन ने कहा कि पाक अधिकृत कश्मीर, बलूचिस्तान, ब्लारिस्तान आदि को नंदवंश काल, अशोक, सिंधु सभ्यता और भारतीय संस्कृति के दृष्टि से जोड़कर देखने की जरूरत है। प्रो. स्टोबडन ने कहा कि भारतीय विश्वविद्यालय व संस्थान को इस तरह के सम- सामयिक विषय को अपने यहां पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए। जिससे कश्मीर यानि पाक अधिकृत कश्मीर की सभ्यता को लोग समझ सके। इस पर शोध भी किया जाना चाहिए। दूसरी तरफ उन जगहों के कानूनी मुद्दों को भी उजागर करने की जरूरत है। इसके बारे में अधिक से अधिक जानकारी इकठ्ठा करने की आवश्यकता है। प्रो. स्टोबड़न ने कहा कि इन जगहों को इकोनॉमिक्स दृष्टि पर फोकस करके देखने की जरूरत है।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो. मधुरेन्द्र कुमार अध्यक्ष, राजनीति विज्ञान विभाग, कुमायूं विश्वविद्यालय, नैनीताल ने कहा कि पाकिस्तान भारत देश में हस्तक्षेप, सीमा प्रायोजित आतंकवाद और अखंड भारत के मानचित्र को गलत ढंग से प्रस्तुत करता है। बलूचिस्तान से भारत के पक्ष में समर्थन आते रहे है। इसको लेकर देश में अभी नये नैरेटिव बनाने की आवश्यकता है। आज की राजनीतिक रणनीति पाक अधिकृत कश्मीर को भारत के अविभाज्य अंग है के नैरेटिव की मांग करता है। हम भारत के लोगों को शपथ लेना होगी कि हम सभी अपनी आकांक्षा के अनुरूप भारत का वातावरण तैयार करें। इसके लिए स्टीरियो टाइप होकर देखने से बचना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें अपने शोध में इन क्षेत्रों के भू-राजनैतिक स्थिति को उद्घाटित करने की आवश्यकता है।

वेब संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि गोलक बिहारी, राष्ट्रीय महासचिव, एफएआईएनएस ने कहा कि पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर अर्थात पीओके के बदले पीओएल कहना उचित होगा। गिलगीत, बलूचीस्तान एवं अन्य जगहों को भारत के लिए महत्वपूर्ण बताया। श्री बिहारी ने कहा कि आज पाकिस्तान की चर्चा आतंकवादी , भिखमंगे और अलोकतांत्रिक देश के रूप में होती है। पाकिस्तान अनैतिक सरंचना और वैश्विक बुराई हैं। यह दुनिया का इकलौता ऐसा देश है, जिसका कोई संस्कृति नहीं है और न ही कोई क्षेत्रीय पहचान है। पाकिस्तान की राष्ट्रीयता की पहचान है इस्लाम है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। पाकिस्तान वैश्विक शांति और क्षेत्रीय पहचान के लिए खतरा हैं।

वेब संगोष्ठी के निदेशक और जनसम्पर्क प्रकोष्ठ के प्रमुख प्रो. पवनेश कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम संयोजक ‘गांधी और शांति अध्यनन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. असलम खान ने विषय प्रवर्तन किया। कार्यक्रम का सफल संचालन गांधी एवं शांति अध्ययन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभय विक्रम सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन संगोष्ठी संयोजक डॉ. असलम खान ने किया। विद्वान अतिथियों का परिचय कार्यक्रम के सह-संयोजक एवं मीडिया अध्यनन विभाग के विभागाध्याक्ष डॉ. प्रशांत कुमार, गांधी व शांति अध्ययन के अध्यक्ष प्रो. सुनील महावर , गांधी शांति अध्ययन विभाग के एसो. प्रो. डॉ. जुगुल दाधीच, एवं हिंदी विभाग के एसो. प्रो. डॉ. अंजनी कुमार श्रीवास्तव ने दिया। कार्यक्रम में मंगलाचरण समाजकार्य विभाग के अध्यक्ष डॉ. एम. विजय कुमार शर्मा प्रस्तुत किया। वेब संगोष्ठी के सलाहकार समिति के सदस्य एमजीसीयूबी के डीएसडब्ल्यू प्रो. आंनद प्रकाश और समाज विज्ञान के अधिष्ठाता प्रो. राजीव कुमार भी मौजूद रहे। आयोजन समिति के सदस्य डॉ. सपना सुगंधा, डॉ. परमात्मा कुमार मिश्र, डॉ. साकेत रमण, डॉ. अल्का, डॉ. सुनील दीपक घोडके, डॉ. उमा यादव, डॉ. आशा मीना, डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह, डॉ. दिनेश व्यास, डॉ. अम्बिकेश त्रिपाठी, डॉ. विश्वेश, डॉ. अनुपम कुमार वर्मा एवं पीआरओ शेफालिका मिश्र व सिस्टम एनालिस्ट दीपक दिनकर सक्रिय रूप में मौजूद थे। साथ ही विश्वविद्यालय के अधिकारीगण, छात्र-छात्राएं एवं कर्मचारी प्रतिभागी के रुप में भारी संख्या में वेब संगोष्ठी से जुड़े रहें। कार्यक्रम का सजीव प्रसारण विश्वविद्यालय के फेसबुक पृष्ठ पर भी हुआ जिससे हजारों लोग जुड़े थे।

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