अपनी मम्मी के साथ 500 से अधिक पौधे लगा चुकी है नन्हीं बच्ची

मेरठ यूपी महज साढ़े तीन साल की किसी नन्हीं बच्ची के अंदर हरियाली और पौधारोपण को लेकर जुनून नहीं बल्कि बड़ा जुनून दिखाई पड़े तो आप और हम इसे भगवान का चमत्कार ही कहेंगे। क्योंकि जिस उम्र में किसी बच्चे या बच्ची को अपने नाम का सही अर्थ पता न हो और वह हरियाली और पौधारोपण को लेकर इतना ज्यादा समर्पित दिखाई पड़े तो उस पर यह कहावत चरितार्थ होती है कि ‘होनहार वीरवान के होत चिकने पाथ, जी हां, शास्त्री नगर, पीवीएस के सामने स्थित शैमरॉक प्राइमरी स्कूल में नर्सरी में पढ़ने वाली आद्या रस्तोगी को यूं तो गाने और जिम्नास्टिक का शौक है। लेकिन इन सबके बीच आद्या को अभी से नहीं बल्कि 1 साल पहले से जब वह मात्र ढाई साल की उम्र की थी तब से उसे हरियाली व पौधारोपण से अत्यधिक प्यार और लगाव हो गया। वह पौधारोपण में इतनी सक्रिय भूमिका निभाती है कि अभी तक उसने अपनी मम्मी के साथ 500 से अधिक पौधे लगा चुकी है और अभी लगातार जगह-जगह लगा रही है।

ग्रीन गर्ल के हाथो में पौधा

अब तो मेरठ के आमोखास लोग और प्रशासनिक अधिकारीगण भी आद्या को ग्रीन गर्ल कहकर संबोधित करने लगे हैं।आपको बता दूं कि आद्या की मम्मी एडवोकेट हिना रस्तोगी हरियाली और पौधारोपण के लिए समर्पित संस्था केडी (कांति देवी) फाउंडेशन (केडीएफ) संचालित करती हैं और केडीएफ के जरिए बीते 2 सालों से मेरठ शहर, जिले और प्रदेश भर में पौधारोपण का कारवां चल रहा है। अभी तक संस्था द्वारा 5 हज़ार से अधिक पौधे जगह-जगह लगाए जा चुके हैं और तुलसी आदि के पौधे दान किए गए हैं।

केडीएफ के इस पौधारोपण अभियान में नन्हीं आद्या स्वतः ही ऐसे जुड़ गई कि पता ही नहीं चला की पौधारोपण कब उसके जुनून में शामिल हो गया और वह इसके लिए जुनूनी हो गई। अभी तक करीब 500 पौधे लगाने में वह बेहद सक्रिय भूमिका निभा चुकी है। आद्या अभी हाल ही में शहीद मेजर केतन शर्मा की स्मृति में लगने वाले 101 पौधा रोपण में बेहद सक्रिय भूमिका निभा रही है। 101 पौधों की सलामी के तहत अभी तक 55 पौधे लग चुके हैं।

इस्माइल इंटर कॉलेज, बीडीएस इंटरनेशनल स्कूल और जेलर हाउस पर भी वह शहीद की स्मृति में शहीद के परिवार के साथ और उपजिलाधिकारी सुनीता सिंह के साथ पौधे लगा चुकी है। जेलर हाउस पर बीते दिनों पौधारोपण को लेकर आद्या के जुनून को देखकर उपजिलाधिकारी सुनीता सिंह ने न केवल ग्रीन गर्ल नन्हीं आद्या की काफी तारीफ की थी और इसे भगवान का चमत्कार भी करार दिया था। उपजिलाधिकारी ने कहा था कि महज साढ़े तीन साल की बच्ची के अंदर पौधारोपण को लेकर इतना बड़ा जुनून पहले कभी नहीं देखा। 

अभी भी लगातार नर्सरी की छात्रा आद्या अपनी मम्मी हिना के साथ पौधारोपण के कार्य में दिल से भाग ले रही है। मेरठ जिले के हस्तिनापुर,  किला परीक्षितगढ़ सहित कई जगहों पर पौधारोपण में बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रही है। ग्रीन गर्ल नन्हीं आद्या नर्सरी (बागवानी) को पौधों की दुकान कहकर संबोधित करती है। सबसे अच्छी बात यह है कि उसे पौधा खरीदने पौधों की दुकान (नर्सरी) जाना बहुत ही ज्यादा अच्छा लगता है।

आद्या के सर्किट हाउस नर्सरी में पौधे चयन करने की ललक और जुनून को देखकर सर्किट हाउस बागवानी के सभी महिला-पुरुष माली और खुद बागवानी प्रभारी उमा शंकर वर्मा भी आद्या की अदा के मुरीद हो गए हैं। पौधा खरीदने के लिए जब मम्मी हिना सर्किट हाउस बागवानी जाती है और एक बार भी साथ में नन्हीं आद्या न हो तो सर्किट हाउस प्रभारी सहित सभी माली सभी चिंतित होकर आद्या के न आने का कारण पूछते हैं।जगह-जगह पौधरोपण के लिए वह मम्मी के साथ शहर के अलग-अलग नर्सरी, सर्किट हाउस, बुद्धा गार्डन, संजय वन आदि जगहों पर पौधा खरीदने जाती है और इस उम्र में बड़े जोश के साथ अलग-अलग जगह पौधे भी लगाने जाती है। बेहतर पर्यावरण, हरियाली और भविष्य में अच्छी मात्रा में हम सबको ऑक्सीजन मिलती रहे आज देश में एक, दो और चार आद्या की नहीं बल्कि दर्जनों और सैकड़ों आद्या की जरूरत है। उसके अनुकरणीय और जुनून से भरे इस पौधारोपण अभियान में आइये हम सब नन्हीं बच्ची को मजबूती प्रदान करें।

नई किलकारी
तीन साल की आद्या में है पौधारोपण का बड़ा जुनून
पौधारोपण को लेकर आद्या के बड़े जुनून को देखकर उपजिलाधिकारी सुनीता सिंह ने ग्रीन गर्ल नन्हीं आद्या की थी काफी तारीफ
नर्सरी की छात्रा आद्या अभी है महज साढ़े तीन साल की
वह अपनी मम्मी द्वारा चलाए जा रहे पौधारोपण महाअभियान में निभाती है बेहद सक्रिय भूमिका
अभी तक अपनी मौजूदगी में लगा चुकी है 500 पौधे
केडीएफ द्वारा लगातार हो रहे पौधारोपण में आद्या बढ़चढ़ कर  ले रही है हिस्सा
आद्या पौधों की नर्सरी (बागवानी) को  ‘पौधों की दुकान’ कहकर संबोधित करती है।
नन्हीं आद्या को अब सभी ग्रीन गर्ल कहकर बुलाने लगे हैं
कुमार विभू

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